GK:संविधान निर्माता डॉ. भीमराव आंबेडकर के सम्मान में जय भीम, जय भारत नारे का क्यों होता है इस्तेमाल

17 अप्रैल /DPH News

संविधान निर्माता डॉ. भीमराव आंबेडकर के सम्मान में जय भीम, जय भारत नारे का इस्तेमाल होता है. यह संदेश देता है कि डॉ. आंबेडकर का सम्मान भी है और देश से जुड़ाव भी. समय के साथ यह नारा सिर्फ अभिवादन नहीं रहा. यह एक पहचान भी बनता गया. यह बराबरी, शिक्षा, अधिकार और संविधान के सम्मान का संकेत बन गया. जानिए, यह नारा कहां से आया और पहली बार किसने कहा्.आंबेडकर जयंती हर साल 14 अप्रैल को मनाई जाती है. जयंती के कार्यक्रमों में एक नारा भी खूब सुनाई देता है. वो नारा है- जय भीम, जय भारत. आइए, इस नारे की कहानी जानते हैं. कैसे बना? किसने गढ़ा? इसका इतिहास क्या है? कैसे यह पूरे देश और जन-जन की जुबान पर आया?यह नारा दो हिस्सों में है. पहला हिस्सा है-जय भीम. दूसरा है-जय भारत. दोनों मिलकर यह संदेश देते हैं कि डॉ. आंबेडकर का सम्मान भी है और देश से जुड़ाव भी. भीम शब्द आंबेडकर के नाम भीमराव से आता है. जय का अर्थ होता है विजय या जीत. इसलिए जय भीम का सरल अर्थ है- डॉ. आंबेडकर के विचारों की जीत या आंबेडकर के रास्ते की जीत. समय के साथ जय भीम सिर्फ अभिवादन नहीं रहा. यह एक पहचान भी बनता गया. यह बराबरी, शिक्षा, अधिकार और संविधान के सम्मान का संकेत बन गया.

जय भीम पहली बार किसने कहा था?इस सवाल का जवाब ज़्यादातर रिपोर्ट्स में एक जैसा मिलता है. कई स्रोत बताते हैं कि जय भीम नारे को बाबू एल. एन. हरदास (लक्ष्मण नगराले) ने 1935 में शुरू किया. यह अभिवादन के रूप में कार्यकर्ताओं के बीच फैलता गया. यानी आधुनिक आंबेडकरवादी आंदोलन में जय भीम का श्रेय सबसे अधिक बाबू एल. एन. हरदास को दिया जाता है.कभी-कभी कुछ लेखों में यह भी कहा जाता है कि जय भीम का प्रयोग बहुत पुराने समय में हुआ होगा. एक दावा भीमा-कोरेगांव की 1818 की लड़ाई से जोड़ा जाता है. कुछ रिपोर्ट्स में यह बात एक संभावना के रूप में आती है. लेकिन इस पुराने दावे पर सब जगह एक जैसी, पक्की और स्पष्ट जानकारी नहीं मिलती. इसलिए व्यवहार में जो बात सबसे मजबूत रूप से उद्धृत होती है, वह 1935 वाली ही है यानी बाबू हरदास का संदर्भ ही उचित प्रतीत होता है.अब इस नारे के साथ जुड़े जय भारत की बात. भारत के लिए जय कहना देशभक्ति की भाषा है. जब जय भारत जोड़ा जाता है, तो संदेश और साफ हो जाता है. यह संदेश ऐसा बनता है-हम आंबेडकर के विचारों के साथ हैं और हम भारत के साथ भी हैं. कई लोगों के लिए यह जोड़ बहुत महत्वपूर्ण रहा है. क्योंकि इससे यह बात उभरती है कि आंबेडकरवाद और देश-प्रेम अलग नहीं हैं, बल्कि संविधान, समानता और नागरिक अधिकार भी देश की ही ताकत हैं.यहां एक फर्क समझना जरूरी है. जय भीम के बारे में पहली बार वाली बात कई जगह मिल जाती है.लेकिन जय भीम, जय भारत को पहली बार किस मंच पर, किस मिनट पर, किस व्यक्ति ने कहा, इसका एक ही, अंतिम, सर्वमान्य रिकॉर्ड आसानी से नहीं मिलता. फिर भी, कुछ लेख बताते हैं कि राजनीति और रैलियों में यह संयोजन खास तौर पर लोकप्रिय हुआ.द प्रिन्ट ने अपने एक लेख में कहा है कि बसपा प्रमुख मायावती अपने भाषण का अंत अक्सर जय भीम-जय भारत से करती हैं. इसका मतलब यह नहीं कि इसे सिर्फ मायावती ने ही बोला. लेकिन इतना संकेत जरूर मिलता है कि यह नारा उत्तर भारत की दलित राजनीति और जनसभाओं में फैलते हुए चर्चित हुआ. इसलिए सरल निष्कर्ष यह है जय भीम का श्रेय बाबू एल. एन. हरदास को जाता है लेकिन जय भीम-जय भारत को एक साथ पहला बोलने वाला तय करना कठिन है. यह तय है कि इसे लोकप्रिय करने में जनआंदोलनों और राजनीतिक मंचों की बड़ी भूमिका है.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *