GK:क्या आप जानते हैं मदर डे सबसे पहले किसने और कहां मनाया किसने कि इसकी शुरुआत पढ़ें पूरी खबर

11 मई/ DPH NEWS

मदर्स डे मई महीने के दूसरे रविवार को भारत समेत दुनिया भर में मनाया जाता है. इसकी शुरुआत अमेरिका से हुई. इस दिन लोग अपनी मां के प्रति प्रेम और सम्मान व्यक्त करते हैं. लेकिन इस दिन का इतिहास बहुत रोचक और थोड़ा विरोधाभासी भी है. जिस महिला ने इसकी शुरुआत की, वही बाद में इसके खिलाफ खड़ी हो गईं. यह कहानी है एना जार्विस की और उनके एक भावनात्मक प्रयास की, जिसके विरोध में वे गिरफ्तार भी हुईं.आइए, जानते हैं कि कैसे शुरू हुआ मदर्स डे? जिसने मदर्स डे की शुरुआत की, आखिर उसी महिला ने क्यों किया बाद में इस खास दिन का विरोध?मदर्स डे एक ऐसा दिन है जो माताओं को समर्पित है. इस दिन लोग अपनी मां को धन्यवाद कहते हैं. उन्हें उपहार देते हैं. उनके साथ समय बिताते हैं. इसका मकसद मां के त्याग और प्रेम को याद करना है. मदर्स डे की औपचारिक शुरुआत 1908 में हुई. यह आयोजन अमेरिका के वेस्ट वर्जीनिया राज्य में किया गया. इसके कुछ साल बाद साल 1914 में इसे आधिकारिक मान्यता मिली. अमेरिका के राष्ट्रपति वुडरो विल्सन ने इस दिन राष्ट्रीय अवकाश घोषित किया. मई के दूसरे रविवार को मदर्स डे मनाए जाने की परंपरा तभी से चली आ रही है.मदर्स डे की शुरुआत एना जार्विस ने की. वे अमेरिका की रहने वाली थीं. उनकी मां का नाम एन रीव्स जार्विस था. उनकी मां समाज सेवा करती थीं. वे महिलाओं और बच्चों की मदद करती थीं. एना अपनी मां से बहुत प्रेम करती थीं. उनकी मां की मृत्यु 1905 में हो गई. इस घटना ने एना को बहुत प्रभावित किया. उन्होंने सोचा कि एक ऐसा दिन होना चाहिए, जो सभी माताओं को समर्पित हो.साल 1908 में एना जार्विस ने पहला मदर्स डे कार्यक्रम आयोजित किया. यह कार्यक्रम एक चर्च में हुआ. इसमें लोगों ने अपनी माताओं को याद किया. आयोजन में सफेद कार्नेशन फूल का इस्तेमाल किया गया. यह फूल पवित्रता और प्रेम का प्रतीक माना गया. इस आयोजन को लोगों ने बहुत पसंद किया. धीरे-धीरे यह विचार फैलने लगा. अलग-अलग राज्यों में भी इसे मनाया जाने लगा.एना जार्विस का मकसद बहुत सरल था. वे चाहती थीं कि लोग अपनी मां के त्याग को समझें. वे चाहती थीं कि लोग अपनी मां के साथ समय बिताएं. उन्हें सम्मान दें. यह दिन किसी बड़े उत्सव के लिए नहीं था. यह एक व्यक्तिगत और भावनात्मक दिन था. इसका उद्देश्य परिवार को जोड़ना था mother’s Day डे शुरू करने वालीं एना इसके विरोध में क्यों उतरी थीं? अरेस्ट भी हुईंMother’s Day: दुनियाभर में मई माह के दूसरे रविवार को मदर्स डे मनाया जाता है. इसकी शुरुआत अमेरिका में हुई. लोग इस दिन मां के प्रति विशेष सम्मान व्यक्त करते हैं, लेकिन दिलचस्प बात है कि जिस महिला ने मदर्स डे की नींव रखी वही बाद इसमें इसके विरोध में उतरी. उनकी गिरफ्तारी भी हुई. जानिए, मदर्स डे की शुरुआत कैसे हुई, कौन थीं इसकी शुरुआत वालीं एना जार्विस और क्यों विरोध में उतरीं.Mother’s day: मदर्स डे शुरू करने वालीं एना इसके विरोध में क्यों उतरी थीं? अरेस्ट भी हुईंएना जार्विस ने मदर्स डे की शुरुआत की और वही बाद में इसके खिलाफ खड़ी हो गईं.दिनेश पाठकदिनेश पाठकUpdated on: May 07, 2026 6:55 PM ISTShareमदर्स डे मई महीने के दूसरे रविवार को भारत समेत दुनिया भर में मनाया जाता है. इसकी शुरुआत अमेरिका से हुई. इस दिन लोग अपनी मां के प्रति प्रेम और सम्मान व्यक्त करते हैं. लेकिन इस दिन का इतिहास बहुत रोचक और थोड़ा विरोधाभासी भी है. जिस महिला ने इसकी शुरुआत की, वही बाद में इसके खिलाफ खड़ी हो गईं. यह कहानी है एना जार्विस की और उनके एक भावनात्मक प्रयास की, जिसके विरोध में वे गिरफ्तार भी हुईं.आइए, जानते हैं कि कैसे शुरू हुआ मदर्स डे? जिसने मदर्स डे की शुरुआत की, आखिर उसी महिला ने क्यों किया बाद में इस खास दिन का विरोध?ये भी पढ़ेंजिस पर लगाया बैन, उसी को कप्तान बनाने का बोर्ड का इरादा, वनडे और T20I में संभालेगा कमानअच्छी नहीं दिखती… शुरुआत में झेला रिजेक्शन, फिर एक्ट्रेस ने दी 300 करोड़ी फिल्म, इतनी मिली थी फीसटर्म इंश्योरेंस – कम खर्च में बड़ी सुरक्षाकब-कैसे शुरू हुआ मदर्स डे?मदर्स डे एक ऐसा दिन है जो माताओं को समर्पित है. इस दिन लोग अपनी मां को धन्यवाद कहते हैं. उन्हें उपहार देते हैं. उनके साथ समय बिताते हैं. इसका मकसद मां के त्याग और प्रेम को याद करना है. मदर्स डे की औपचारिक शुरुआत 1908 में हुई. यह आयोजन अमेरिका के वेस्ट वर्जीनिया राज्य में किया गया. इसके कुछ साल बाद साल 1914 में इसे आधिकारिक मान्यता मिली. अमेरिका के राष्ट्रपति वुडरो विल्सन ने इस दिन राष्ट्रीय अवकाश घोषित किया. मई के दूसरे रविवार को मदर्स डे मनाए जाने की परंपरा तभी से चली आ रही है. अमेरिका की रहने वाली एना जार्विस थीं. उनकी मां का नाम एन रीव्स जार्विस था. उनकी मां समाज सेवा करती थीं. वे महिलाओं और बच्चों की मदद करती थीं. एना अपनी मां से बहुत प्रेम करती थीं. उनकी मां की मृत्यु 1905 में हो गई. इस घटना ने एना को बहुत प्रभावित किया. उन्होंने सोचा कि एक ऐसा दिन होना चाहिए, जो सभी माताओं को समर्पित हो.पहला कार्यक्रम कब आयोजित हुआ?साल 1908 में एना जार्विस ने पहला मदर्स डे कार्यक्रम आयोजित किया. यह कार्यक्रम एक चर्च में हुआ. इसमें लोगों ने अपनी माताओं को याद किया. आयोजन में सफेद कार्नेशन फूल का इस्तेमाल किया गया. यह फूल पवित्रता और प्रेम का प्रतीक माना गया. इस आयोजन को लोगों ने बहुत पसंद किया. धीरे-धीरे यह विचार फैलने लगा. अलग-अलग राज्यों में भी इसे मनाया जाने लगा.एना जार्विस का मकसद बहुत सरल था. वे चाहती थीं कि लोग अपनी मां के त्याग को समझें. वे चाहती थीं कि लोग अपनी मां के साथ समय बिताएं. उन्हें सम्मान दें. यह दिन किसी बड़े उत्सव के लिए नहीं था. यह एक व्यक्तिगत और भावनात्मक दिन था. इसका उद्देश्य परिवार को जोड़ना था.आधिकारिक मान्यता कैसे मिली?एना जार्विस ने कई साल तक अभियान चलाया. उन्होंने नेताओं को पत्र लिखे. लोगों को इस दिन के महत्व के बारे में बताया. उनके प्रयास सफल हुए. साल 1914 में अमेरिकी सरकार ने इसे मान्यता दी. इसके बाद यह दिन हर साल मनाया जाने लगा। धीरे-धीरे अन्य देशों ने भी इसे अपनाया.Mothers Day Historyसाल 1914 में अमेरिकी सरकार की मान्यता के बाद पहले पूरे देश और फिर दुनियाभर में मदर्स डे मनाया जाने लगा.एना जार्विस ने विरोध क्यों किया?यह कहानी का सबसे दिलचस्प हिस्सा है. एना जार्विस ने जिस दिन की शुरुआत की, उसी का उन्होंने बाद में विरोध किया. कारण था इसका व्यावसायीकरण. जैसे-जैसे मदर्स डे लोकप्रिय हुआ, बाजार इसमें शामिल हो गया. कंपनियां ग्रीटिंग कार्ड बेचने लगीं. फूल और उपहार महंगे होने लगे. एना को यह बिल्कुल पसंद नहीं था. उनका मानना था कि यह दिन सच्चे प्रेम के लिए है. इसे व्यापार का हिस्सा नहीं बनाना चाहिए. एना जार्विस ने कई बार सार्वजनिक रूप से विरोध किया. उन्होंने दुकानों और कंपनियों के खिलाफ आवाज उठाई. वे कहती थीं कि लोग खुद अपने हाथ से पत्र लिखें. उनका कहना था कि खरीदे गए कार्ड भावनाओं को नहीं दिखाते. वे चाहती थीं कि लोग सच्चे दिल से अपनी मां को धन्यवाद दें.जिसका एना ने विरोध किया वही बाजारीकरण आज इस खास त्योहार पर भारी पड़ गया है. अब मदर्स डे एक बड़ा व्यावसायिक अवसर है. इस मौके पर बड़े-बड़े ऑफर आते हैं. सोशल मीडिया पर पोस्ट की भरमार होती है. हालाँकि, इसके बीच असली भावना कहीं-कहीं छिप जाती है. लेकिन फिर भी यह दिन लोगों को अपनी मां के करीब लाता है.मदर्स डे सिर्फ एक दिन नहीं है. यह एक भावना है. यह मां के प्रति आभार व्यक्त करने का अवसर है. इसकी शुरुआत एक बेटी के प्रेम से हुई थी. एना जार्विस ने इसे दिल से शुरू किया, लेकिन समय के साथ इसका रूप बदल गया. आज जरूरत है कि हम इसकी असली भावना को समझें. मां का सम्मान केवल एक दिन नहीं, हर दिन होना चाहिए

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