GK:क्या आप जानते हैं यूरोप में 35 डिग्री सेल्सियस तापमान से क्यों हो रही है मौते, जानिए इसके पीछे का कारण

30 मई/ DPH NEWS

सार

ब्रिटेन और फ्रांस ने लोगों को धूप और गर्मी से बचने की सलाह दी है. यूरोप के कई शहरों में तापमान 35 डिग्री सेल्सियस के आसपास पहुंच गया है. मई महीने में गर्मी का बीते वर्षों का रिकार्ड टूट गया है. रात का तापमान भी 20 डिग्री के आसपास दर्ज किया गया है. भारत जैसे देशों में 35 डिग्री आम बात है या यूं कहें कि मई महीने में यह सामान्य तापमान माना जाएगा

विस्तार

ब्रिटेन और फ्रांस ने लोगों को धूप और गर्मी से बचने की सलाह दी है. यूरोप के कई शहरों में तापमान 35 डिग्री सेल्सियस के आसपास पहुंच गया है. मई महीने में गर्मी का बीते वर्षों का रिकार्ड टूट गया है. रात का तापमान भी 20 डिग्री के आसपास दर्ज किया गया है.

भारत जैसे देशों में 35 डिग्री आम बात है या यूं कहें कि मई महीने में यह सामान्य तापमान माना जाएगा यूरोप के कई देश इन दिनों गर्मी की चपेट में हैं. फ्रांस में गर्मी से सात मौतें हुई हैं. इटली ने दोपहर के समय बाहर काम करने पर रोक लगा दी है. .फ्रांस या ब्रिटेन में 35 डिग्री तापमान सिर्फ एक संख्या नहीं है. यह वहां के घरों की बनावट, कम एसी, शरीर की कम आदत, गर्म रातें, नमी, और सामाजिक परिस्थितियों के साथ मिलकर खतरनाक बन रहा है. जलवायु बदल रही है, इसलिए यूरोप में भी गर्मी अब नई चुनौती है. सही चेतावनी, बेहतर शहरी योजना और लोगों की जागरूकता से इन मौतों को काफी हद तक रोका जा सकता है

आखिर 35 डिग्री सेल्सियस तापमान से क्यों हो रही है मौत

से आखिर क्यों हो रही हैं मौतें?मानव शरीर मौसम के अनुसार ढलता है. जिन देशों में गर्मी लंबे समय तक रहती है, वहां लोग धीरे-धीरे गर्मी सहने के तरीके सीख लेते हैं. शरीर भी पसीना निकालने, नमक संतुलन रखने और तापमान नियंत्रित करने में बेहतर हो जाता है. यूरोप के कई हिस्सों में गर्मी का मौसम छोटा होता है. बहुत से लोगों का शरीर लंबे समय तक तेज गर्मी झेलने का अभ्यास नहीं करता. इसलिए 35 डिग्री सेल्सियस तापमान वहां असामान्य बन गया है.फ्रांस और ब्रिटेन में कई पुराने घर बने हुए हैं. इनका डिजाइन ठंड से बचाने के लिए किया गया है. दीवारें मोटी हैं. खिड़कियां ऐसी होती हैं कि गर्मी बाहर निकले, इसका इंतजाम न के बराबर होता है. जब बाहर तेज गर्मी होती है, तो ये घर हीट ट्रैप बन जाते हैं यानी गर्मी अंदर फंस जाती है. रात में भी घर जल्दी ठंडा नहीं हो पाता. कई लोगों को लगता है कि घर के अंदर सुरक्षित होंगे, लेकिन कई बार अंदर की गर्मी ज्यादा खतरनाक हो जाती है.भारत में बहुत जगहों पर एसी नहीं होता, लेकिन शहरों में एसी आम हो गया है. यूरोप में लंबे समय तक एसी की जरूरत ही नहीं मानी गई. कई घरों में एसी नहीं लगा होता. अगर लगा भी हो, तो हर कमरे में नहीं होता. बिजली महंगी होने से लोग चलाने में भी हिचकते हैं. नतीजा यह कि हीटवेव में सुरक्षित ठंडा वातावरण बनाना मुश्किल हो रहा है.

35 डिग्री सेल्सियस तापमान एक दिन के लिए हो, तो संभालना आसान हो सकता है. लेकिन हीटवेव में कई दिन तक लगातार गर्मी रहती है. इस साल यही हो रहा है. खास बात यह है कि रातें भी गर्म रह रही हैं. शरीर को रात में ठंडक नहीं मिलती. बार-बार नींद टूटती है. दिल और दिमाग पर दबाव बढ़ता है. यही वजह है कि कई दिन की गर्मी ज्यादा नुकसान करती है और लोगों की सेहत इसी वजह से बिगड़ रही है.

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