
21 अप्रैल /DPH NEWS
अमरनाथ यात्रा 2026 के लिए रजिस्ट्रेशन शुरू हो चुके हैं. श्रद्धालुओं के लिए ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरह से परमिट जारी करने की व्यवस्था की गई है. यात्रा की शुरुआत 3 जुलाई से होगी और 28 अगस्त 2026 को रक्षाबंधन के दिन समाप्त होगी. दो महीने चलने वाली अमरनाथ यात्रा में हर साल लाखों श्रद्धालु शमिल होते हैं और एक लम्बा सफर तय करके बाबा अमरनाथ की गुफा तक पहुंचते हैं. बाबा बर्फानी की गुफा तक पहुंचने के लिए दो रूट हैं.पहला रूट कश्मीर के गांदरबल जिले के बालटाल से जुड़ा है और दूसरा अनंतनाग जिले के पहलगाम से होकर अमरनाथ की गुफा तक पहुंचता है. यह श्रद्धालु पर निर्भर है कि वो कौन सा रूट चुनते हैं. हालांकि, ज्यादातर श्रद्धालु पहलगाम वाला रूट चुनकर दर्शन करने के लिए पहुंचते है-
पहले रूट में 48 किलोमीटर का सफरबाबा अमरनाथ की गुफा पहुंचने के लिए दो में से एक रास्ता चुनना पड़ता है. पहला रास्ता पहलगाम रूट वाला होता है. इस रूट से गुफा तक पहुंचते हैं तो 48 किलोमीटर लम्बा सफर तय करना पड़ता है. 48 किलोमीटर वाला रूट चुनते हैं तो सफर पहलगाम से शुरू होता है और रास्ते में कई पड़ाव पड़ते हैं. जैसे पहलगाम से 14 किलोमीटर के बाद चंदनवाड़ी आता है. इसके बाद पिस्सू टॉप, जोजी बल, नागकोटी, शेषनाग, वारबल, महागुनस टॉप और पाबीबल होते हुए पंचतरणी पहुंचते हैं. पंचतरणी से 3 किलोमीटर के बाद संगम पड़ाव पड़ता है. यहां से अमरनाथ गुफा तक पहुंचने के लिए 3 किलोमीटर का सफर तय करना पड़ता है. इस पूरी यात्रा को पूरा होने में औसतन 4 से 5 दिन का समय लगता है.पहलगाम मार्ग लंबा और सुंदर है. इसमें पिस्सू टॉप और महागुनस दर्रे जैसी खड़ी चढ़ाई शामिल हैं. रास्ते में लंगर (सामुदायिक रसोई) और टेंट जैसी सुविधाएं उपलब्ध रहती हैं.
दूसरे रूट से 14 किलोमीटर का सफरअमरनाथ यात्रा का दूसरा रूट बालटाल से शुरू होता है. 14 किलोमीटर लम्बे इस रूट में यात्रा की शुरुआत बालटाल से होती है जो डोमाली, बरारी और संगम पड़ाव से होते हुए अमरनाथ गुफा तक जाती है. यह रूट पहलगाम वाले मार्ग से काफी छोटा है, लेकिन रास्ता आसान नहीं है.बालटाल वाले रूट में खड़ी चढ़ाई होने के कारण श्रद्धालुओं के लिए इस रूट से गुफा तक पहुंचना आसान नहीं होता. रास्ते में गहरी खाई भी मुश्किलें बढ़ा सकती है.
यात्रा में कितने दिन लगते हैं?अगर गुफा तक पहुंचने के लिए श्रद्धालु 48 किलोमीटर लम्बे पहलगाम वाले रूट को चुनते हैं तो यात्रा को पूरा होने में औसतन 4 से 5 दिन का समय लगता है. वहीं, 14 किलोमीटर लम्बे बालटाल वाले रूट को चुनते हैं तो गुफा तक पहुंचने में दो दिन लगते हैं. हालांकि जो श्रद्धालु लम्बी पैदल यात्रा नहीं कर पाते उनके लिए दूसरे हेलिकॉप्टर समेत दूसरे साधन उपलब्ध हैं.
13 से 70 साल के श्रद्धालु यात्रा में शामिल होंगेश्री अमरनाथजी श्राइन बोर्ड के अध्यक्ष और उपराज्यपाल मनोज सिन्हा के मुताबिक,वार्षिक अमरनाथ यात्रा 3 जुलाई से शुरू होकर 28 अगस्त को रक्षा बंधन के अवसर पर समाप्त होगी. इस साल यह तीर्थयात्रा कुल 57 दिनों तक चलेगी.13 से 70 वर्ष की उम्र के श्रद्धालु यात्रा में जा सकते हैं. सभी तीर्थयात्रियों के लिए आरएफआईडी कार्ड अनिवार्य होगा, जबकि सामूहिक दुर्घटना बीमा कवर को 5 लाख रुपए से बढ़ाकर 10 लाख रुपए कर दिया गया है. यात्रा को सुगम बनाने के लिए बालटाल और नुनवान दोनों मार्गों पर पटरियों का चौड़ीकरण, बेहतर पुल और पर्वतीय बचाव दल और सुरक्षा बलों की तैनाती के साथ आपदा प्रबंधन प्रणालियों को पहले से बेहतर किया गया है.
