
17 अप्रैल/DPH News
इस हफ़्ते नोएडा में हुई हिंसक घटनाओं के बाद वहां के प्रशासन की तरफ़ से कई क़दम उठाए गए हैं. इन क़दमों में नोएडा में मज़दूरी बढ़ाने का एलान, औद्योगिक इलाकों में बढ़ी हुई मज़दूरी की जानकारी वाले बोर्ड लगाना और फ़ैक्ट्रियों के अंदर काम की हालत सुधारने के वादे शामिल हैं.इसके अलावा सोमवार को हुए तोड़फोड़ वाले प्रदर्शनों के पीछे ‘साज़िश’ तलाशने के लिए पुलिस की मुहिम जारी है.नोएडा के असंगठित मज़दूरों की कामकाज से लेकर उनके रहने-सहने की हालात की पड़ताल करते हुए बीते मंगलवार यानी 14 अप्रैल को दोपहर के करीब दो बजे नोएडा के फेज़ 2 पुलिस थाने के बाहर हमें शहनाज़ पुलिस से बात करने की कोशिश करती नज़र आईं.क्या बात है, हमारे यह पूछने पर उन्होंने बताया, “मेरे भतीजे सफ़ीक़ मोहम्मद ने पास की एक फ़ैक्ट्री में नया नया काम शुरू किया था. शनिवार (11 अप्रैल) को वह काम से घर नहीं लौटा. स्थानीय लोगों ने बताया कि पुलिस उसे पकड़कर ले गई. तब से हम उसे ढूँढ रहे हैं.”इससे एक दिन पहले हज़ारों मज़दूर वेतन बढ़ाने और बेहतर काम की हालत की मांग को लेकर नोएडा की सड़कों पर उतरे थे.नोएडा के कई इलाक़ों में प्रदर्शन हुए. कुछ जगहों पर हिंसा भी हुई. गाड़ियाँ जलाई गईं, पत्थर फेंके गए और फ़ैक्ट्रियों के कुछ दरवाज़े के शीशे भी तोड़े गए.लेकिन प्रदर्शन के लिए सड़कों पर आने से पहले ही मज़दूर स्थानीय प्रशासन से बातचीत कर रहे थे.इसकी एक बड़ी वजह यह थी कि पड़ोसी राज्य हरियाणा ने इसी आठ अप्रैल को न्यूनतम मज़दूरी 11,257 रुपये से बढ़ाकर 15,220 रुपये करने का ऐलान किया था.मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक़, नोएडा के अलग-अलग इलाक़ों में प्रदर्शन करने वाले मज़दूरों की संख्या करीब 40 हज़ार थी.हालाँकि 14 अप्रैल को प्रशासन ने मज़दूरी बढ़ाने सहित कुछ मांगें मानने पर सहमति जताई लेकिन इससे शहनाज़ को कोई ख़ास राहत नहीं मिली है.जिस कॉलोनी में वह और कई दूसरे मज़दूर रहते हैं, उसके बाहर वह फिर से पुलिस वालों के पास जाती हैं. पुलिस वाले उन्हें वापस थाने जाने को कहते हैं. वह फिर से चल पड़ती हैं.थाने से बाहर निकलने के बाद वह बताती हैं, “मैं अंदर गई और कहा कि मैं अपने लापता भतीजे की शिकायत देने आई हूँ.””उन्होंने कहा बाहर जाकर लिखो और फिर लेकर आओ. उन्होंने मुझे एक खाली काग़ज़ दे दिया. मैंने कहा कि मुझे लिखना नहीं आता तो बोले बाहर जाकर किसी से लिखवाकर ले आओ.”एक बार फिर, बिना किसी जानकारी के मायूस होकर वह अपनी कॉलोनी की तरफ़ लौट जाती हैं.आख़िरकार 15 अप्रैल की शाम को परिवार ने बताया कि उन्हें इस बात का पता चला कि सफ़ीक़ को गिरफ़्तार कर लिया गया है.शहनाज़ अकेली नहीं थीं. फेज़ 2 पुलिस थाने के बाहर की गली में ऐसे कई परिवारों की भीड़ दिखी जो अपनों के बारे में कोई ख़बर मिलने का इंतज़ार कर रहे थे.गिरफ़्तारी के बारे में सवाल पूछे जाने पर गौतमबुद्ध नगर (नोएडा) की पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह ने बताया कि सोमवार को हुई हिंसा के मामले में अब तक 300 से ज़्यादा लोगों को गिरफ़्तार किया जा चुका है और सात एफ़आईआर दर्ज की गई हैं.
