
12 मई/ DPH NEWS
ईरान होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों के बाद अब डिजिटल डेटा पर टैक्स लगाने की तैयारी में है. इसे ‘मुज्तबा का ट्रिलियन डॉलर दांव’ माना जा रहा है. ईरान अंतरराष्ट्रीय कानूनों का हवाला देते हुए, अंडरवाटर इंटरनेट केबलों से प्रतिदिन गुजरने वाले खरबों डॉलर के वित्तीय डेटा पर शुल्क वसूलना चाहता है. यदि शुल्क नहीं दिया गया, तो ईरान केबल काटने की धमकी दे रहा है, होर्मुज स्ट्रेट में डबल नाकाबंदी लागू है. एक तरफ ईरान है, जिसकी मर्जी के बिना यहां से कोई शिप नहीं गुजर सकता है तो दूसरी तरफ ट्रंप का ब्लॉकेड लगा है, जिसके चलते ईरानी जहाज यहां से नहीं गुजर पा रहे हैं. तेल नहीं बेच पाने की वजह से ईरान को बड़ा नुकसान हो रहा है, जिसकी भरपाई अभी तक ईरान होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों के बदले टोल टैक्स वसूलकर कर रहा था, लेकिन अब ईरान की तैयारी यहां से गुजरने वाले डिजिटल डेटा के बदले भी टैक्स वसूलने की है. इसे मुज्तबा का ट्रिलियन डॉलर दांव माना जा रहा है.होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान का कंट्रोल है. मुज्तबा अरब में समंदर के इस संकरे हिस्से को किसी कीमत पर छोड़ने के लिए तैयार नहीं है. फिर चाहें उन्हें अमेरिका के साथ दोबारा युद्ध ही क्यों ना लड़ना पड़े? यहां से गुजरने वाले जहाज सिर्फ ईरान की मंजूरी और उसे टोल टैक्स चुकाकर ही गुजर सकते हैं.टोल टैक्स के जरिए ईरान मोटा मुनाफा कमा रहा है, लेकिन होर्मुज से होने वाले उसकी कमाई अब कई गुना बढ़ सकती है और इसकी वजह होगा तेल के बाद ईरान का डिजिटल ब्लॉक.ईरान होर्मुज से गुजरने वाले डिजिटल डेटा के बदले शुल्क वसूलने की तैयारी में है. ईरान होर्मुज में मौजूद फाइबर इंटरनेट केबल पर शुल्क लगा सकता है यानी यहां से डेटा भेजने के बदले ईरान को टैक्स चुकाना पड़ेगा, जो देश शुल्क नहीं चुकाएगा ईरान उसके डेटा को ट्रांसफर नहीं होेने देगा.यानी अभी तक ईरान होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों के बदले टोल टैक्स वसूल रहा था, लेकिन अब वो डिजिटल डेटा के बदल भी टैक्स वसूलेगा, जिसने यूरोप से लेकर एशिया तक के देशों की टेंशन बढ़ा दी है.रिपोर्ट में कहा गया है इन केबलों के माध्यम से SWIFT बैंकिंग संदेश, शेयर बाजार के व्यापार से जुड़ा डेटा और पैसे के लेन-देन से जुड़ा डेटा ट्रांसफर होता है. इन केबल्स से प्रतिदिन करीब 10 ट्रिलियन डॉलर का वित्तीय डेटा गुजरता है. ईरान का मानना है कि इतनी बड़ी आर्थिक गतिविधि उसके अधिकार क्षेत्र से हो रही है. इसके बदले ईरान को शुल्क मिलना चाहिए.
