क्या था गोल्ड कंट्रोल एक्ट, किसने किया था लागू


सार
1968 में लागू हुआ गोल्ड कंट्रोल एक्ट सोने पर सरकारी शिकंजे की सबसे बड़ी मिसाल था. लेकिन 1990-91 के आर्थिक सुधारों के दौरान मनमोहन सिंह ने इस कानून को खत्म कर दिया. अगर यह कानून होता तो आज पीएम मोदी को सोना खरीदने से रोकना नहीं पड़ती
14 मई/ DPH NEWS
विस्तार
पीएम मोदी कर रहे कई तरह के जतन ताकि बाहर का सोना भारत न आए. टैक्स पर टैक्स लगाए जा रहे हैं, लोगों को जागरूक किया जा रहा है. लेकिन इन सब की कोई जरूरत नहीं पड़ती अगर मनमोहन सिंह ने 1990 में सोने से जुड़ा पुराना कानून खत्म न किया होता है. क्योंकि तब ऐसी ऐसी पाबंदियां थीं कि लोग सोना अपने घरों में जमा ही नहीं कर सकते थे. बकायदा लिमिट तय थी. तो ऐसा हुआ क्या? क्यों मनमोहन सिंह को यह कानून ही रद्द करना पड़ा?एक दौर था जब भारत में सरकार तय करती थी कि कौन कितना सोना रख सकता है.बात 1968 की है. तब सरकार ने कहा था- लोग बहुत सोना खरीद रहे हैं, देश का डॉलर जा रहा है, अर्थव्यवस्था डूब जाएगी. लेकिन 1990 आते-आते सरकार ने मान लिया, जितना सोना रोकने की कोशिश की, उतनी ही तस्करी बढ़ गई.
इंदिरा गांधी की सरकार ने 1968 में किया था गोल्ड कंट्रोल एक्ट लागू
और अब 2026 में फिर वही बहस लौट आई है. फर्क बस इतना है कि इस बार गोल्ड कंट्रोल एक्ट नहीं है, लेकिन सोने के आयात पर ड्यूटी, महंगा गोल्ड और बढ़ती तस्करी पर सरकार की चिंता फिर सामने है.शुरुआत होती है 1960 के दशक से. तब भारत गरीब देश था. विदेशी मुद्रा भंडार कमजोर था. दूसरी तरफ भारतीय समाज में सोना सिर्फ गहना नहीं था- सुरक्षा था, बचत था, इज्जत था. शादी से लेकर संकट तक, हर जगह सोना काम आता था. सरकार को लगा कि देश का बहुत पैसा सोना खरीदने में जा रहा है. तब कर दिया.
