GK:क्या आप जानते हैं 90 के दशक में मशहूर होने वाली”मेलोडी खाओ,खुद जान जाओ”किसने लिखी थी लाइन

22 मई/DPH NEWS

सार

मेलोडी जो 90 के दशक में अपने स्वाद और विज्ञापन के कारण भी मशहूर हुई. विज्ञापन की लाइन थी- ‘मेलोडी खाओ खुद जान जाओ’. अब सवाल है कि ये लाइनें कब और किसने लिखी जो विज्ञापन के इतिहास में अमर हो गईं

विस्तार

इटली के दौर पर गए पीएम मोदी ने वहां की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी को तोहफे में मेलोडी टॉफी दी. इसका एक वीडियो मेलोनी ने सोशल मीडिया पर शेयर किया है. यह वही मेलोडी जो 90 के दशक में अपने स्वाद और विज्ञापन के कारण भी मशहूर हुई. विज्ञापन की लाइन थी- ‘मेलोडी खाओ खुद जान जाओ’. अब सवाल है कि ये लाइनें कब और किसने लिखी जो विज्ञापन के इतिहास में अमर हो गईं और सोशल मीडिया पर फिर से इसकी यादें आज ताजा हो गईं.मेलोडी खाओ खुद जान जाओ… मेलोडी टॉफी के लिए यह लाइन यूं ही नहीं लिखी गई, इसके पीछे कई चुनौतियां थी जिन्हें ध्यान में रखते हुए 90 के दशक में इसका विज्ञापन तैयार हुआ था. पीएम मोदी के इटली के दौरे यह टॉफी चर्चा में आ गई है. इटली पहुंचने पर पीएम मोदी ने बुधवार को वहां की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी को मेलोडी टॉफी का पैकेट तोहफे में दिया. इसका वीडियो खुद मेलोनी ने सोशल मीडिया पर शेयर किया है.इसके साथ ही वो लाइन भी वायरल हो रही है जिसे मेलोडी के विज्ञापन की ब्रांडिंग में इस्तेमाल किया गया था.वो लाइन है मेलोडी खाओ खुन जान जाओ. यह लाइन 90 के दशक में लिखी गई थी. अब सवाल है कि यह लाइन किसने लिखी जो सोशल मीडिया पर एक बार फिर पॉपुलर हो रही है.पीएम मोदी ने मेलोनी को मेलोडी का जो पैकेट गिफ्ट किया है उस पर पार्ले लिखा है. पार्ले प्रोडक्ट्स ही वो कंपनी जो यह टॉफी बनाती है. तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पार्ले नाम वाले शेयरों में भी 5 फीसदी की बढ़ोतरी हुई. मार्केट में मेलोडी की एंट्री 90 के दशक में हुई. उस दौर में मार्केट में बच्चों के लिए खासतौर पर फ्रूट फ्लेवर वाली कैंडियों का दबदबा था. इस दबदबे को तोड़ने के लिए मेलोडी को चॉकलेट टॉफी के तौर पर इसे पेश किया गयामेलोडी को जब बनाया गया तो इसका टेस्ट और इसकी ब्रांडिंग इसकी पहचान बनी. डबल लेयर में इसका डिजाइन था. बाहर से कैरमल और अंदर से चॉकलेट का फ्लेवर बच्चों और बड़ों दोनों को पसंद आया और इसकी ब्रांडिंग के लिए तैयार किया गया जिंगल भी.इसकी ब्रांडिंग की पूरी जिम्मेदारी मार्केटिंग एजेंसी एवरेस्ट को सौंपी गई. चुनौती थी कि इसे चॉकलेट प्रोडक्ट के रूप में कैसे पेश किया जाए जो बच्चों को पसंद आए. कैम्पेन की क्रिएटिव टीम का नेतृत्व हरेश मूरजानी कर रहे थे और उन्हें एक शानदार विचार आया. वो विचार यह था कि बच्चों के चहेते या उनके जैसा बनने की इच्छा रखने वाले लोगों को दिखाया जाए, जो मेलोडी के बारे में एक प्रश्न पूछें और बच्चा उसका उत्तर दे.इसी को ध्यान में रखते हुए कॉपीराइटर सुलेखा बाजपेयी ने इसकी पंक्तियां लिखीं. यह कंपनी को काफी पसंद आईं.

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