
25 जून/ DPH NEWS
सार
बिहार के रोहतास जिले में स्थित रोहतासगढ़ किला, जिसे भारत के सबसे प्राचीन और रहस्यमयी किलों में गिना जाता है. यह किला जितना अपनी भव्यता और इतिहास के लिए जाना जाता है, उतना ही यहां से जुड़ी डरावनी कहानियों के कारण भी हमेशा से चर्चे में रहता है. कहा जाता है कि इस किले की दीवारों से कभी खून टपकता था और रात के समय यहां से चीखने-रोने की आवाजें सुनाई देती थीं
विस्तार
बिहार के रोहतास जिले में स्थित रोहतासगढ़ किला, जिसे भारत के सबसे प्राचीन और रहस्यमयी किलों में गिना जाता है. यह किला जितना अपनी भव्यता और इतिहास के लिए जाना जाता है, उतना ही यहां से जुड़ी डरावनी कहानियों के कारण भी हमेशा से चर्चे में रहता है. कहा जाता है कि इस किले की दीवारों से कभी खून टपकता था और रात के समय यहां से चीखने-रोने की आवाजें सुनाई देती थीं.यहां कई ऐसी ऐतिहासिक जगहें मौजूद हैं, जिनसे जुड़े किस्से आज भी लोगों को हैरान कर देते हैं. इन्हीं में से एक है बिहार के रोहतास जिले में स्थित रोहतासगढ़ किला, जिसे भारत के सबसे प्राचीन और रहस्यमयी किलों में गिना जाता है. यह किला जितना अपनी भव्यता और इतिहास के लिए जाना जाता है, उतना ही यहां से जुड़ी डरावनी कहानियों के कारण भी हमेशा से चर्चे में रहता है.
कहा जाता है कि इस किले की दीवारों से कभी खून टपकता था और रात के समय यहां से चीखने-रोने की आवाजें सुनाई देती थीं.
इस कीले के दीवारों से टपकता है खून, किले का इतिहास बेहद पुराना और दिलचस्प माना जाता है. मान्यता है कि इसका निर्माण त्रेता युग में अयोध्या के सूर्यवंशी राजा त्रिशंकु के पौत्र और राजा हरिश्चंद्र के पुत्र रोहिताश्व ने करवाया था. इसी वजह से इस किले का नाम रोहतासगढ़ पड़ा. पहाड़ों की ऊंचाई पर बना यह विशाल किला आज भी अपनी मजबूती और शानदार आर्किटेक्चर के लिए प्रसिद्ध है.सोन घाटी की शान माना जाता है रोहतासगढ़रोहतासगढ़ किला बिहार की सोन घाटी की खूबसूरती और शक्ति का प्रतीक माना जाता है. यह किला लगभग 2000 फीट की ऊंचाई पर स्थित है और यहां से आसपास का नजारा बेहद अद्भुत दिखाई देता है. किले के भीतर कई प्राचीन द्वार, मंदिर, महल और ऐतिहासिक स्ट्रक्चर मौजूद हैं, जो पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करती हैं. इसके अलावा यहां के झरने भी काफी मशहूर हैं, जो कैमूर की पहाड़ियों से निकलकर सोन नदी में जाकर मिलते हैं.इतिहासकारों के अनुसार, रोहतासगढ़ किला लंबे समय तक हिंदू शासकों का कब्जा रहा. लेकिन 16वीं सदी में मुगलों ने इस पर कब्जा कर लिया और कई सालों तक यहां शासन किया. कहा जाता है कि स्वतंत्रता संग्राम 1857 के दौरान बाबू कुंवर सिंह के भाई अमर सिंह ने इसी किले से अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह का संचालन किया था. इस कारण यह किला भारतीय इतिहास में एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है रोहतासगढ़ किले से जुड़ी सबसे रहस्यमयी बात इसकी दीवारों से खून निकलने की कहानी है
. स्थानीय लोगों के अनुसार, कई साल पहले इस किले की पत्थर की दीवारों से लाल रंग का तरल पदार्थ निकलता था, जिसे लोग खून मानते थे.
करीब 200 साल पहले फ्रांसीसी इतिहासकार बुकानन ने भी अपनी यात्रा के दौरान इस घटना का जिक्र अपने दस्तावेजों में किया था. उन्होंने लिखा था कि किले की दीवारों से खून जैसा पदार्थ निकलता दिखाई देता है. स्थानीय लोगों का दावा है कि रात के समय इस किले से रोने और चीखने की आवाजें भी सुनाई देती थीं. यही वजह है कि लंबे समय तक लोग शाम होने के बाद इस किले के आसपास जाने से डरते थे. हालांकि इन बातों की कोई वैज्ञानिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन आज भी यह कहानी लोगों के बीच रहस्य और डर का विषय बनी हुई है.
