

सार
विस्तार
ऑनलाइन कुर्बानी क्या है?इसमें लोग घर बैठे मोबाइल या वेबसाइट के जरिए अपनी कुर्बानी बुक करते हैं और फिर किसी भरोसेमंद संस्था के जरिए जानवर की कुर्बानी करवाई जाती है. साथ ही खास बात यह है कि पूरा काम नियमों के हिसाब से होता है और मीट जरूरतमंद लोगों तक पहुंचाया जाता है.
28 मई/ DPH NEWS
आजकल ईद-उल-अजहा के मौके पर एक नया तरीका तेजी से लोगों के बीच लोकप्रिय हो रहा है, जिसे ऑनलाइन कुर्बानी कहा जाता है. इसमें लोग घर बैठे मोबाइल या वेबसाइट के जरिए अपनी कुर्बानी बुक करते हैं और फिर किसी भरोसेमंद संस्था के जरिए जानवर की कुर्बानी करवाई जाती है. साथ ही खास बात यह है कि पूरा काम नियमों के हिसाब से होता है और मीट जरूरतमंद लोगों तक पहुंचाया जाता है.इसमें लोग किसी भरोसेमंद वेबसाइट, ऐप या चैरिटी संस्था पर जाकर एक जानवर (जैसे बकरी, गाय या भेड़) चुनते हैं. फिर वे ऑनलाइन पेमेंट करते हैं.
इसके बाद तय जगह जैसे स्लॉटर हाउस में इस्लामी नियमों के अनुसार जानवर की कुर्बानी की जाती है. कई संस्थाएं इसका वीडियो या फोटो भी शेयर करती हैं ताकि लोग भरोसा कर सकें कि कुर्बानी सही तरीके से हुई है. इसके बाद मीट पैक करके जरूरतमंद लोगों, गरीब परिवारों या चैरिटी में बांट दिया जाता है. इस पूरे प्रोसेस में व्यक्ति को खुद मौजूद रहने की जरूरत नहीं होती, इसलिए इसे आसान और समय बचाने वाला तरीका माना जाता है.यूएई और सऊदी अरब जैसे देशों में यह ट्रेंड बहुत तेजी से बढ़ रहा है. वहां लोग अपनी सुविधा और समय की कमी की वजह से ऑनलाइन कुर्बानी को ज्यादा पसंद कर रहे हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक, बड़े शहरों में अब लोग खुद जानवर खरीदने और रखने के बजाय ऑनलाइन बुकिंग को आसान और सुरक्षित तरीका मानते हैं.
यूएई और सऊदी अरब में सरकार और संस्थाएं पहले से ही कुर्बानी के लिए तय स्लॉटर हाउस सिस्टम को फॉलो करती हैं. वहां शहरों में घरों के पास जानवर रखना या खुले में कुर्बानी करना आसान नहीं होता, इसलिए लोग पहले से ही व्यवस्थित सिस्टम पर निर्भर रहते हैं. इसी वजह से ऑनलाइन कुर्बानी वहां लोगों के लिए बहुत आसान विकल्प बन गया है. इसमें लोग सिर्फ भुगतान करते हैं और बाकी पूरा काम तय जगहों पर सुरक्षित तरीके से हो जाता है.
साथ ही इससे समय भी बचता है और साफ-सफाई भी बनी रहती है. कई रिपोर्ट्स में बताया गया है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म अब कुर्बानी को ज्यादा आसान और तेज बना रहे हैं. भारत में ऑनलाइन कुर्बानी क्यों कम दिखाई देती है?भारत में ऑनलाइन कुर्बानी का चलन अभी यूएई और सऊदी अरब जितना बड़ा नहीं है. इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि यहां लोग अभी भी पारंपरिक तरीके से कुर्बानी करना ज्यादा पसंद करते हैं. यानी जानवर खुद खरीदना, देखभाल करना और फिर कुर्बानी करना. इसके अलावा भारत में अलग-अलग राज्यों के नियम और धार्मिक परंपराएं भी इस पर असर डालती हैं. हालांकि कोविड के बाद भारत में भी ऑनलाइन कुर्बानी का चलन बढ़ा है, लेकिन अभी यह पूरी तरह मुख्य धारा में नहीं आया है.
कई जगह लोग अभी भी अपने आसपास ही यह रस्म पूरी करते हैं. आगे आने वाले समय में क्या बदल सकता है?एक्सपर्ट्स का मानना है कि आने वाले समय में ऑनलाइन कुर्बानी और भी बढ़ सकती है, क्योंकि लोग अब डिजिटल सुविधाओं के आदी हो रहे हैं. खासकर शहरों में रहने वाले लोग इसे आसान और सुरक्षित विकल्प के रूप में देख रहे हैं. साथ ही ईद जैसे मौके पर लोग चाहते हैं कि काम जल्दी, साफ और सही तरीके से हो, इसलिए ऑनलाइन सिस्टम धीरे-धीरे लोगों की पहली पसंद बन सकता है. हालांकि भारत में यह पूरी तरह तभी बढ़ेगा जब लोगों की सोच और सिस्टम दोनों और ज्यादा आसान होंगे. फिलहाल यूएई और सऊदी अरब इस डिजिटल कुर्बानी ट्रेंड में सबसे आगे हैं
