


4 जून /DPH NEWS
सार
क्या आप जानते हैं कि जब दुनिया में फ्रिज नहीं थे तब क्या होता था. कब फ्रिज पहली बार बना और भारत में कैसे इसकी शुरुआत हुई?फ्रिज के अविष्कार से पहले हजारों वर्षों तक इंसानों के पास भोजन को ठंडा रखने का कोई साधन नहीं था. न ही बर्फ को सुरक्षित रखने का कोई तरीका था. उस समय चीन में नदियों और झीलों से बर्फ काटकर जमीन के नीचे बनाए गड्ढों में रखी जाती थी
विस्तार
क्या आप जानते हैं कि जब दुनिया में फ्रिज नहीं थे तब क्या होता था. कब फ्रिज पहली बार बना और भारत में कैसे इसकी शुरुआत हुई?फ्रिज के अविष्कार से पहले हजारों वर्षों तक इंसानों के पास भोजन को ठंडा रखने का कोई साधन नहीं था. न ही बर्फ को सुरक्षित रखने का कोई तरीका था. उस समय चीन में नदियों और झीलों से बर्फ काटकर जमीन के नीचे बनाए गड्ढों में रखी जाती थी, ताकि ये सुरक्षित रहे. ईरान में मिट्टी की गुंबददार संरचनाएं बनती थीं तो यूरोप में घरों में आइस हाउस का इस्तेमाल किया जाता था. लाइव साइंस की एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत में सदियों से मटके को ही देसी फ्रिज के तौर पर यूज किया जाता था. 2500 ईसा पूर्व सिंधु घाटी सभ्यता की खोदाई में मिट्टी के मिले ऐसे बर्तन इसका सबूत हैं.
18 वीं सदी में वैज्ञानिकों के मन में आर्टिफिशियल रेफ्रिजरेशन का विचार आया.
सबसे पहले स्कॉटिश प्रोफेसर विलियम कुलेन ने 1755 में एक छोटी मशीन डिजाइन की. इसे इस तरह बनाया गया कि ये आसपास की हवा को सोख कर बर्फ बना देती थी. हालांकि यह सिर्फ एक प्रयोग तक सीमित रहा. इसके बाद 1805 में अमेरिकी अविष्कारक ओलिवर इवांस ने बर्फ बनाने के लिए एक मशीन बनाई. हालांकि सबसे ज्यादा सफलता मिलती अमेरिकी मूल के इंजीनियर जैकब पर्किंस को. उन्होंने 1834 में न सिर्फ रेफ्रिजरेशन मशीन बनाई, बल्कि इसका पेटेंट भी कराया. इसीलिए उन्हें फादर ऑफ द रेफ्रिजरेटर कहा जाता है. आधुनिक फ्रिज पर्किंस की उसी मशीन की डिजाइन पर आधारित है.यह एक लकड़ी और धातु के फ्रेम का बना था. इसमें कंपेसर, पाइप और केमिकल गैसों का प्रयोग किया गया था. उस वक्त यह बिजली से नहीं चलता था. बल्कि भाप इंजन से चलाया जाता था. इसका आकार बड़ा था और घर में रखा जाना इसे असंभव था. समस्या ये भी थी ये तकनीक बहुत महंगी थी. ऊर्जा की खपत ज्यादा थी और रखरखाव भी कठिन था. उस समय फ्रिज में जो गैस उपयोग होती थी वह बहुत जहरीली और ज्वलनशील होती थी. इसीलिए शुरुआत में फ्रिज का प्रयोग सिर्फ उद्योगों तक ही सीमित रखा गया.
19वीं सदी के मध्य में कई वैज्ञानिकों और इंजीनियरों ने रेफ्रिजरेशन तकनीक को बेहतर बनाया.
इनमें एक नाम है जॉन गौरी. यह एक अमेरिकी चिकित्सक थे जिन्होंने अस्पतालों के मरीजों को ठंडी हवा उपलब्ध कराने के लिए एक ऐसी मशीन विकसित की जो बर्फ बना सकती थी. 1870 में जर्मन इंजीनियर कार्ल वॉन लिंडे ने 1870 के दशक में एक और रेफ्रिजरेशन प्रणाली विकसित की, जिससे बीयर उद्योग, मीट उद्योग और खाद्य भंडारण में क्रांति आ गई.साइंस हिस्ट्री की एक रिपोर्ट के मुताबिक इस तकनीक में ऑक्सीजन को बाहर निकालकर रेफ्रिजरेशन प्रणाली को और उपयोगी बनाया.1913 में घरेलू उपयोग के लिए शुरुआती इलेक्ट्रिक फ्रिज बाजार में आए. अगले दो दशकों में अमेरिका और यूरोप में इनकी मांग तेजी से बढ़ी. 1920 और 1930 के दशक तक फ्रिज मध्यमवर्गीय परिवारों की पहुंच में आने लगे.द्वितीय विश्व युद्ध के बाद फ्रिज तेजी से घरेलू जीवन का हिस्सा बन गया. 1950 के दशक तक अमेरिका के अधिकांश शहरी घरों में फ्रिज पहुंच चुका था. यूरोप में भी युद्धोत्तर आर्थिक विकास के साथ इसका प्रसार बढ़ा.उस वक्त तक भारत में फ्रिज नहीं पहुंचा था, हालांकि विदेशों से बर्फ का व्यापार जरूर होता था. अमेरिका से जहाजों के जरिए बर्फ लाई जाती थी.भारत में पहली बार फ्रिज 1928 में प्रयोग हुआ था. उस वक्त फ्रिज अमेरिका और ब्रिटेेन से आयात किए जाते थे. यह बहुत ही लग्जरी माना जाता था. हालांकि भारत का पहला स्वदेशी फ्रिज 1958 में बन सका था. गोदरेज ने 1 जुलाई 1958 को देश का पहला स्वदेशी रेफ्रिजरेटर लॉन्च किया था. स्वतंत्रता के बाद भारत में घरेलू फ्रिज का बाजार धीरे-धीरे विकसित हुआ. 1950 और 1960 के दशक में बड़े शहरों के संपन्न परिवारों में फ्रिज दिखाई देने लगे. 1970 और 1980 के दशक तक यह भारतीय मध्यम वर्ग के लिए एक प्रतिष्ठित घरेलू उपकरण बन गया. इसके बाद कई कंपनियों ने फ्रिज का निर्माण शुरू कर दिया
