21 जुलाई/ DPH NEWS
सार
अक्सर जब आप कहीं घूमने जाते हैं सड़कों पर नेशनल हाईवे पर आपने देखा होगा की सड़कों के किनारे जो पेड़ होते हैं उनको व्हाइट कलर किया होता है क्या आप जानते हैं यह सफेद कलर क्यों किया जाता है क्या है इसके पीछे का राज चलो आज हम आपको बताते हैं जानकारी के अनुसारयह सफेद पेंट पेड़ों की सुरक्षा के साथ-साथ सड़क दुर्घटनाओं को रोकने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है
विस्तार
अक्सर जब आप कहीं घूमने जाते हैं सड़कों पर नेशनल हाईवे पर आपने देखा होगा की सड़कों के किनारे जो पेड़ होते हैं उनको व्हाइट कलर किया होता है क्या आप जानते हैं यह सफेद कलर क्यों किया जाता है क्या है इसके पीछे का राज चलो आज हम आपको बताते हैं जानकारी के अनुसारयह सफेद पेंट पेड़ों की सुरक्षा के साथ-साथ सड़क दुर्घटनाओं को रोकने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है सफेद रंग सूर्य की किरणों को परावर्तित (reflect) करता है. गर्मियों में जब तेज धूप पड़ती है तो सफेद पेंट पेड़ के तने को अत्यधिक गर्म होने से बचाता है. इससे पेड़ की छाल फटने या जलने से बचती है. रात के समय तापमान अचानक गिरने पर भी यह इंसुलेशन का काम करता है. ठंडे इलाकों में पाले (frost) से पेड़ को बचाने में भी सफेद पेंट मदद करता है.सफेद पेंट (जिसे आमतौर पर चूना या विशेष वॉटर-बेस्ड पेंट से बनाया जाता है)
कीटों, दीमक, फंगस और बैक्टीरिया को दूर रखता है. यह पेड़ की छाल को सांस लेने में मदद करता है और हानिकारक कीड़ों के अंडे देने से रोकता है.
भारत जैसे उष्णकटिबंधीय देश में जहां नमी ज्यादा होती है, यह प्रैक्टिस पेड़ों को स्वस्थ रखने में कारगर साबित हुई है.रात में गाड़ी चलाते समय हेडलाइट्स की रोशनी सफेद रंगे तनों पर पड़ती है तो वे दूर से चमकते दिखाई देते हैं. इससे ड्राइवर को सड़क का किनारा साफ पता चलता है, खासकर घुमावदार रास्तों, हाईवे और अंधेरी सड़कों पर. कई एक्सीडेंट घुमाव पर पेड़ से टकराने के कारण होते हैं. सफेद पेंट इन दुर्घटनाओं को कम करने में मदद करता है. यही वजह है कि इसे “रोड सेफ्टी पेंट” भी कहा जाता हैभारत में यह प्रथा ब्रिटिश काल से चली आ रही है. वन विभाग, पीडब्ल्यूडी और स्थानीय प्रशासन नियमित रूप से पेड़ों को सफेद रंग से रंगते हैं. आमतौर पर जून-जुलाई और दिसंबर-जनवरी में यह काम किया जाता है. कई राज्यों में इसे अनिवार्य बना दिया गया है,
