GK:क्या आप जानते हैं कई और सफेद छतरी में क्या अंतर है

16 जून/ DPH NEWS

सार

नसून ने पूरे भारत में दस्तक दे दी है. सड़कें गीली, आसमान में काले बादल और हर तरफ छातों की रंग-बिरंगी भीड़. लेकिन क्या आप जानते हैं कि आप जिस छाते का इस्तेमाल रोज कर रहे हैं, वो सही है भी या नहीं? बाजार में काले, सफेद, रंग-बिरंगे छाते उपलब्ध हैं

विस्तार

नसून ने पूरे भारत में दस्तक दे दी है. सड़कें गीली, आसमान में काले बादल और हर तरफ छातों की रंग-बिरंगी भीड़. लेकिन क्या आप जानते हैं कि आप जिस छाते का इस्तेमाल रोज कर रहे हैं, वो सही है भी या नहीं? बाजार में काले, सफेद, रंग-बिरंगे छाते उपलब्ध हैं, लेकिन ज्यादातर लोग इनके बीच के अंतर को नहीं समझतेगलत छाता चुनने से बारिश में भीगना, पैसे का नुकसान और कभी-कभी स्वास्थ्य को खतरा भी होता है. लोग अक्सर डिजाइन के चक्कर में भारी बारिश में गलत छाते का इस्तेमाल करने लगते हैं. इसकी वजह से वो भीग जाते हैं. आज हम आपको बताते हैं क्या होता है अलग-अलग छातों के बीच क्या अंतर होता है. खासकर काले और सफ़ेद छाते के बीच का अंतर काफी महत्वपूर्ण है.काली छतरी है अम्ब्रेलाअम्ब्रेला मुख्य रूप से बारिश से बचाने के लिए बनाया जाता है. इसमें वॉटरप्रूफ फैब्रिक, मजबूत मेटल या फाइबर ग्लास फ्रेम और हवा का सामना करने वाली डिजाइन होती है. ज्यादातर एक्सपर्ट्स मॉनसून के लिए काले या गहरे रंग के अम्ब्रेला की सलाह देते हैं. विशेषज्ञों के अनुसार सही अम्ब्रेला चुनने के कई फायदे हैं. अच्छा वॉटरप्रूफ छाता ना सिर्फ आपको सूखा रखता है बल्कि फंगल इंफेक्शन, सर्दी-जुकाम और अन्य बीमारियों से भी बचाता है. वहीं गलत छाता इस्तेमाल करने से इलेक्ट्रॉनिक सामान, दस्तावेज और कपड़े भी खराब हो सकते हैं. काला रंग सूर्य की किरणों को सोख लेता है. इससे छाते के अंदर गर्मी कम लगती है और UV प्रोटेक्शन भी बेहतर मिलता है.पैरासोल (जिसे हम अक्सर सफेद छतरी कहते हैं) धूप से बचाने के लिए होता है. यह हल्के कपड़े, लेस और सुंदर डिजाइन वाला होता है लेकिन पानी से बचाने में पूरी तरह नाकाम साबित होता है. सफेद छतरी धूप को रिफ्लेक्ट करती है, जो गर्मियों में घूमने-फिरने के लिए अच्छी है, लेकिन बारिश में पानी सोखकर भारी हो जाती है और जल्दी खराब भी हो जाती है. भारत में 90 प्रतिशत से ज्यादा लोग दोनों को “छाता” कहकर एक ही समझ लेते हैं. खासकर महिलाएं सफेद लेस वाली छतरी को बारिश में भी इस्तेमाल करती दिखती हैं. नतीजा? कपड़ा भीगकर चिपक जाता है, फ्रेम मुड़ जाता है और छाता कुछ ही दिनों में बेकार हो जाता है.मॉनसून सीजन में बाजार में क्या उपलब्ध है?बड़े-बड़े ब्रांड्स अब 2-in-1 छाते ला रहे हैं जो दोनों काम करते हैं— बारिश और UV प्रोटेक्शन. लेकिन इनकी कीमत ज्यादा होती है. आम लोग 300-800 रुपये वाले छाते खरीदते हैं, जिनमें से कई चाइनीज प्रोडक्ट कमजोर फ्रेम के होते हैं.

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