
18 अप्रैल/ DPH News
क्या आपने कभी सोचा है कि प्रकृति ने हमें दो आंखें, दो कान और दो किडनी क्यों दी हैं, जबकि दिल और लिवर सिर्फ एक ही है? विज्ञान कहता है कि यह हमारे शरीर का स्मार्ट बायोलॉजिकल डिजाइन है. अगर हमारे पास इनमें से केवल एक-एक अंग ही होता, तो शायद मानव सभ्यता का विकास इस रूप में नहीं हो पाता है. एक अंग के साथ जीना मुमकिन तो है, लेकिन वह जीवन जोखिमों से भरा और क्षमताओं में बेहद सीमित होता है.इंसानी शरीर का ढांचा किसी इंजीनियर द्वारा तैयार किए गए नक्शे जैसा नहीं है, बल्कि यह लाखों वर्षों की विकास प्रक्रिया यानी ‘इवोल्यूशनरी डिजाइन’ का परिणाम है. विकासवाद का सिद्धांत कहता है कि अतीत में जिन जीवों के पास शारीरिक अंगों का बैकअप था, उनके जीवित रहने की संभावना उन लोगों से कहीं अधिक थी, जिनके पास केवल एक अंग था. यही कारण है कि प्रकृति ने हमारे जीन में अंगों के जोड़े को आगे बढ़ाया. रिसर्च भी मानती है कि शरीर को चोट और बीमारी से बचाने के लिए अतिरिक्त क्षमता के साथ तैयार किया गया है.इंसानी शरीर को गौर से देखें तो यह दो बराबर हिस्सों में बंटा हुआ लगता है. विज्ञान की भाषा में इसे ‘बॉडी सिमेट्री’ कहते हैं. बीबीसी साइंस फोकस के अनुसार, दुनिया के अधिकांश जटिल जीव बाएं और दाएं दोनों ओर एक जैसे अंगों के साथ विकसित हुए हैं. यह संतुलन हमें चलने, दौड़ने और शारीरिक स्थिरता बनाए रखने में मदद करता है. अगर अंगों का यह जोड़ा न होता, तो हमारे शरीर का भार और संतुलन बिगड़ जाता, जिससे सामान्य गतिविधियां करना भी एक बड़ी चुनौती बन जाता हैदो आंखों का होना केवल देखने के लिए नहीं, बल्कि ‘थ्री-डी विजन’ के लिए जरूरी है. हमारी दोनों आंखें एक ही वस्तु को दो अलग-अलग कोणों से देखती हैं, जिससे दिमाग को दूरी और गहराई का सटीक अंदाजा होता है. अगर हमारे पास केवल एक आंख होती, तो दुनिया हमें फ्लैट यानी बिल्कुल सपाट नजर आती. ऐसी स्थिति में ड्राइविंग करना, खेल खेलना या सड़क पर चलते हुए गहराई का अंदाजा लगाना लगभग नामुमकिन हो जाता. एक आंख के साथ दुर्घटनाओं का जोखिम कई गुना बढ़ जाता है.सुनने की प्रक्रिया में दो कान होने का सबसे बड़ा फायदा आवाज की दिशा का पता लगाना है. हमारा मस्तिष्क इस बात की गणना करता है कि आवाज किस कान तक पहले पहुंची और कितनी तीव्र थी. इससे हमें तुरंत पता चल जाता है कि खतरा या कोई पुकार किस तरफ से आ रही है. यदि केवल एक ही कान होता, तो हम आवाज तो सुन पाते, लेकिन यह समझ नहीं पाते कि वह किधर से आई है. यह स्थिति शिकारियों से बचने या आधुनिक समय में ट्रैफिक के बीच सुरक्षित चलने के लिए बेहद खतरनाक साबित होती हैकिडनी हमारे शरीर में खून को फिल्टर करने का काम करती है. दो किडनी होने का मतलब है कि शरीर के पास फिल्टरेशन की दोगुनी क्षमता और एक बेहतरीन बैकअप है. चिकित्सा विज्ञान कहता है कि एक किडनी के साथ भी सामान्य जीवन जिया जा सकता है, यही कारण है कि लोग किडनी डोनेट कर पाते हैं, लेकिन कल्पना कीजिए कि अगर हमारे पास होती ही एक किडनी और वह किसी बीमारी या चोट के कारण खराब हो जाती, तो व्यक्ति के पास जीवन बचाने का कोई दूसरा रास्ता नहीं बचता है. दो किडनी हमें सुरक्षा की एक अतिरिक्त परत देती हैं.अक्सर सवाल उठता है कि जब आंख और कान दो हैं, तो दिल दो क्यों नहीं? विज्ञान कहता है कि दिल एक ही है लेकिन इसके भीतर दो शक्तिशाली पंपिंग सिस्टम (लेफ्ट और राइट साइड) काम करते हैं. अगर शरीर में दो अलग-अलग दिल होते, तो उनके बीच तालमेल बिठाना मुश्किल होता और शरीर को उन्हें चलाने के लिए बहुत अधिक ऊर्जा खर्च करनी पड़ती है. वहीं, लिवर के पास अपनी कोशिकाओं को दोबारा पैदा करने की अद्भुत क्षमता होती है. यह इतना शक्तिशाली अंग है कि इसे किसी दूसरे बैकअप की जरूरत ही नहीं पड़ती है.दो आंखें, दो कान और दो किडनी हमारे शरीर में कोई अतिरिक्त लग्जरी नहीं हैं, बल्कि यह एक सुरक्षा कवच है. एक अंग के साथ जीवन संभव तो है, लेकिन वह बहुत नाजुक और असुरक्षित होता है. अंगों का जोड़ा हमें केवल बेहतर काम करने की क्षमता ही नहीं देता, बल्कि जीवन-मरण की स्थिति में जीवित रहने का अवसर भी प्रदान करता है. प्रकृति ने हमें इस तरह डिजाइन किया है कि हम दुनिया को पूरी गहराई से देख सकें, हर दिशा से सुन सकें और बीमारियों के खिलाफ मजबूती से खड़े रह सकें.
