

दिल्ली/ 8 जून/ DPH NEWS
सार
दिल्ली कॉकरोच जनता पार्टी का जंतर मंतर आया सैलाब इतना बड़ा हुजूम देखकर सभी लोगों के होश उड़ गए कुछ ही दिनों में इतना बड़ा एक प्लेटफार्म तैयार हो गया जिसका नाम कॉकरोच जनता पार्टी रखा गया जानकारी अनुसार शनिवार को कॉकरोच जनता पार्टी ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन किया. चंद दिनों में दो करोड़ से अधिक फॉलोवर हासिल कर लेने वाले इस सोशल मीडिया अकांउट (कॉकरोच इज़ बैक) की कॉल पर काफ़ी लोग इकट्ठा हुए
विस्तार
दिल्ली कॉकरोच जनता पार्टी का जंतर मंतर आया सैलाब इतना बड़ा हुजूम देखकर सभी लोगों के होश उड़ गए कुछ ही दिनों में इतना बड़ा एक प्लेटफार्म तैयार हो गया जिसका नाम कॉकरोच जनता पार्टी रखा गया जानकारी अनुसार शनिवार को कॉकरोच जनता पार्टी ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन किया.
चंद दिनों में दो करोड़ से अधिक फॉलोवर हासिल कर लेने वाले इस सोशल मीडिया अकांउट (कॉकरोच इज़ बैक) की कॉल पर काफ़ी लोग इकट्ठा हुए.
प्रदर्शनकारियों ने एक आवाज़ में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े की मांग की. सीजेपी ने इसके लिए सरकार को एक सप्ताह का अल्टीमेटम भी दिया है.ऐसे में सवाल है कि सीजेपी के लिए आगे की राह क्या होगी?कुछ राजनीतिक जानकार इसे अभी अपरिपक्व और दिशाविहीन आंदोलन मान रहे हैं, जिसमें बड़ी वजह किसी अनुभवी चेहरे का न होना मान रहे हैं.हालांकि सीजेपी के उठाए मुद्दे के प्रति आम जनता का जुड़ाव देखकर कुछ विश्लेषक इसमें संभावना देख रहे हैं.प्रमुख मांग पूरी हो जाने की स्थिति के बाद सीजेपी का अगला कदम क्या होगा, इस पर सौरव दास ने कहा कि ‘आगे की राह सभी मिलकर तय करेंगे. ये सभी पीड़ित युवाओं का मंच है.’उन्होंने कहा, “आगे की राह हम सभी मिलकर तय करेंगे. अभी हमारा जो फ़्यूचर है, वो फ़्यूचर है आज का. और आज हम लोग डिमांड कर रहे हैं कि धर्मेंद्र प्रधान रिज़ाइन करें या फिर प्रधानमंत्री मोदी जी उन्होंने इस्तीफ़ा देने पर मजबूर करें.
कॉकरोच जनता पार्टी को आम जनता का से मिला बड़ा समर्थन
“सीजेपी प्रवक्ता सौरव दास ने कहा कि इतनी बड़ी तादाद में लोगों ने आकर हमारे आंदोलन को वेलिडेशन (स्वीकार्यता) दे दी है.उन्होंने कहा, “यहां इतने लोगों का इकट्ठा होना आपेक्षित था, कुछ लोग दूसरे शहरों में होने के चलते नहीं आ सके. मगर हम लोगों को वेलिडेशन मिल चुका है कि ये मूवमेंट एक सही राह पर है.”हालांकि प्रदर्शन में पहुंचे लोगों की तादाद को लेकर भी सोशल मीडिया पर बहस देखी जा रही है. बीबीसी के संवाददाता के मुताबिक़, शनिवार को यहां सैकड़ों लोग जुटे.सीजेपी के एक अन्य प्रवक्ता अभिषेक रांका ने मीडिया के सवाल के जवाब में दावा किया, “उन्होंने लोगों की गिनती तो नहीं की है पर ये संख्या आसानी से हज़ारों में होगी.”वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक शरद गुप्ता कहते हैं,
“शनिवार को जंतर-मंतर पर जिस तरह लोग इकट्ठे हुए, यह दर्शाता है कि लोगों के अंदर व्यवस्था के प्रति असंतोष और आक्रोश का असर है.
“”वे इसे निर्भया कांड के समय मौसम की परवाह न करते हुए लोगों के सड़कों पर उतरने से भी जोड़ते हैं.”शरद गुप्ता का मानना है कि मौजूदा व्यवस्था की एक रणनीति अभी भी उनके फ़ेवर में है.वो कहते हैं, “बीजेपी ने हर जगह पर युवाओं को जोड़कर रखा है. पीएम मोदी खुद कई मौकों पर युवाओं को संबोधित करते हैं, परीक्षा पर चर्चा करते हैं.”हालांकि उन्हें नहीं लगता कि फ़िलहाल यह किसी वीपी सिंह, जेपी या अन्ना हजारे की तरह का कोई आंदोलन बन पाएगा.दूसरी ओर, वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक स्मिता गुप्ता का कहना है कि यह आंदोलन ऐसे समय आया है जब मोदी सरकार का हनीमून पीरियड ख़त्म हो गया है.वो कहती हैं, “देश में जो आर्थिक हालात हैं, चाहे आप पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध से इसे जोड़ना चाहें, लोग अब इस हालात से थोड़ा तंग हो रहे हैं.”
