


21 मई/ DPH NEWS
सार
भारत में ऐसे बहुत-से राज्य हैं, जो कि अपने मूल नाम के अलावा उपनाम से भी जाने जाते हैं। इनमें से एक राज्य ऐसा भी है, जिसे ‘बादलों का घर’ भी कहा जाता है
विस्तार
भारत में ऐसे बहुत-से राज्य हैं, जो कि अपने मूल नाम के अलावा उपनाम से भी जाने जाते हैं। इनमें से एक राज्य ऐसा भी है, जिसे ‘बादलों का घर’ भी कहा जाता है। यह राज्य कोई और नहीं, बल्कि पूर्वोत्तर का मेघालय राज्य है।इसके शाब्दिक अर्थ की बात करें, तो वह भी यही है। संस्कृत में ‘मेघ’ का अर्थ होता है ‘बादल’ और ‘आलय’ का अर्थ होता है ‘घर’। ऐसे में इस राज्य को ‘बादलों का घर’ भी कहा जाता है। इस नाम के पीछे अन्य महत्त्वपूर्ण कारण हमने इस लेख में बताए हैं। आप इस बारे में विस्तार से जान सकते हैं।
बंगाल की खाड़ी से नम हवाएं उत्तर की तरफ बढ़ती हैं, तो वह इन पहाड़ियों के बीच फंसकर ऊपर उठ जाती हैं।
भारत के नक्शे पर यदि हम मेघालय की भौगोलिक स्थिति देखें, तो इसकी संरचना कुछ इस प्रकार है कि यह बादलों को अपनी ओर आकर्षित करता है। इसकी भौगोलिक स्थिति तीन पहाड़ियों के बीच है, जो कि इस प्रकार हैंःइन पहाड़ियों की आकृति ऊपर देखने पर ‘कीप’ की तरह लगती है। ऐसे में जब बंगाल की खाड़ी से नम हवाएं उत्तर की तरफ बढ़ती हैं, तो वह इन पहाड़ियों के बीच फंसकर ऊपर उठ जाती हैं। इससे बादलों का निर्माण होता है और इस क्षेत्र में अधिक वर्षा देखने को मिलती है।आपको बता दें कि मेघालय में दुनिया के सबसे अधिक नमी वाले स्थान मौजूद हैं। यहां पूरी दुनिया में सबसे अधिक वर्षा रिकॉर्ड जाती है। ये स्थान इस प्रकार हैंः-मासिनराम-यहां दुनिया में सबसे अधिक औसत वर्षा रिकॉर्ड जाती है।-चेरापूंजी-यह इलाका भी अपने यहां होने वाली अधिक वर्षा के लिए जाना जाता है। इन दोनों इलाकों में अक्सर पूरे वर्ष बादल छाए रहते हैं और बादल सड़क व घरों तक उतर आते हैं। ऐसे में यहां बादलों को छुआ जा सकता है।आपको बता दें कि मेघालय अपनी खूबसूरती के लिए इतना प्रसिद्ध है कि इस राज्य को ‘पूर्व का स्कॉटलैंड’ भी कहा जाता है। यहां की पहाड़ियां और हरियाली से बनी प्राकृतिक सुंदरता की वजह से ब्रिटिश काल में मेघालय को यह नाम मिला था।
