हिमाचल प्रदेश: भारतीय जनता पार्टी के विधायक के रिश्तेदार पुलिस की गिरफ्त में, मामला माइनिंग का

प्रशासन की नाक तले भू माफिया द्वारा मीनिंग का गोरख धंधा लगातार बढ़ता जा रहा है और प्रशासन के अधिकारी अपनी जेब में गम करके इस कारोबार को और भी बढ़ावा दे रहे हैं ऐसा ही एक मामला हमीरपुर में स्टोन क्रेशर से जुड़े अवैध खनन और दस्तावेजी अनियमितताओं के बहुचर्चित मामले में बुधवार को बड़ा घटनाक्रम सामने आया। हमीरपुर सदर विधायक आशीष शर्मा के भाई उमेश शर्मा और चाचा प्रवीण कुमार ने सुप्रीम कोर्ट से अग्रिम जमानत याचिका खारिज होने के बाद मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (सीजेएम) कोर्ट हमीरपुर में आत्मसमर्पण कर दिया। दोनों आरोपियों की जमानत याचिका इससे पहले हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट द्वारा भी खारिज की जा चुकी थी। इसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में राहत की गुहार लगाई, लेकिन वहां भी उन्हें निराशा हाथ लगी।सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें चार सप्ताह के भीतर सरेंडर करने के निर्देश दिए थे। निर्धारित समय सीमा बुधवार को समाप्त हो रही थी, जिसके चलते दोनों आरोपी दोपहर बाद अपने अधिवक्ताओं के साथ अदालत में पेश हुए और आत्मसमर्पण कर दिया। सीजेएम कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए दोनों को एक दिन के पुलिस रिमांड पर भेज दिया है।यह मामला स्टोन क्रेशर से जुड़े अवैध खनन और रिकॉर्ड में कथित हेराफेरी का है। पुलिस ने पूर्व में एसपी के नेतृत्व में आरोपियों के स्टोन क्रेशर पर छापेमारी की थी, जहां से सीसीटीवी कैमरों की फुटेज और हार्ड डिस्क सहित कई अहम डिजिटल साक्ष्य बरामद किए गए थे। इन साक्ष्यों के आधार पर जांच को आगे बढ़ाया गया और मामला न्यायालय तक पहुंचा।

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