सूरज बरसा रहा आग देश में गर्मी का कहर

20 अप्रैल/ DPH News

सूरज की तपिश अब गर्मी का कहर बढ़ाने लगी है। आसमान में चिलचिलाती धूप अब झुलसाने लगी है। भगवान भास्कर के दिनों दिन रौद्र होते रूप की वजह से जनजीवन बेहाल होने लगा है। इसका असर पक्षियों पर भी अब देखने को मिल रहा है। पढ़ते तापमान की वजह से घोसलों में रखे अंडे सूखने लगे हैं और भ्रूण निर्जलीकरण के कारण खत्म हो रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में देखें तो गांवों में दोपहर के बाद सन्नाटे की स्थिति नजर आने लगी है और दूर-दूर तक वीराने सी स्थिति दिखने लगी है। शहर की गलियों में भी आमदरफ्त अब दोपहर को काफी कम हो गई है। जिला मौसम कार्यालय के अनुसार अभी तापमान स्थित रहेगा और राहत की बात यह है कि जिले में अभी हीट वेब (लू) की स्थिति आगामी एक सप्ताह तक नहीं है।मौसम विभाग के अनुसार जिले में राजस्थान के ऊपर से उत्तरी पश्चिमी हवाएं आ रही है। इसकी वजह से तापमान में तेजी से उछाल देखने को मिला है। लेकिन अभी तापमान सामान्य से 2 डिग्री सेल्सियस ही ऊपर चल रहा है। जब तापमापी का पारा सामान्य से 5 डिग्री तक ऊपर जाएगा तो जिले में भी लू की स्थितियां बनने लगेंगी। अभी एक सप्ताह तक यह स्थिति बनती नहीं दिख रही है।जिसे तेजी से जिले के तापमान में बढ़ोत्तरी हुई है उसका सबसे ज्यादा असर पक्षी जगत में देखने को मिल रहा है। इस गर्मी में जिन पक्षियों के घोसले धूप की सिधाई में बने हैं या नम वातावरण से दूरी है, उनके अंडे भी सूख रहे हैं। विशेष तौर पर शहरी क्षेत्र में जो पक्षी घरों के रोशनदानों में दक्षिण -पश्चिम दिशा में अपना घोसला बनाए हैं उनके साथ यह स्थिति ज्यादा देखने को मिल रही है। शहरी क्षेत्र में घरों के रोशनदान में बने घोसलों में पेड़-पौधों की छाया वाली नमी नहीं मिलती है और इसका सीमेंट कांक्रीट तेजी से गर्म होता है। जिसके वजह से अंडे सूख जाते हैं। गर्मी के मौसम में पक्षियों के अंडे सूखना एक गंभीर समस्या होती है। इसकी मुख्य वजह अत्यधिक गर्मी, नमी की कमी और घोसले के तापमान में वृद्धि है। जब घोसले का तापमान 107 फारेनहाइट (लगभग 41.6 डिग्री सेल्सियस) के ऊपर हो जाता है तो अंडे विकसित नहीं हो पाते हैं और सूखकर खराब हो जाते हैं। इस स्थिति में वही अंडे बच पाते हैं जो घने पेड़ों में निचली और अंदरूनी डगाल पर बनाए जाते हैं। गर्मी में पक्षियों को भी निर्जलीकरण की समस्या होती है, विशेषतौर पर शहरी क्षेत्रों में। लिहाजा लोगों को पेड़ पौधों और अन्य स्थानों पर पक्षियों के लिए पानी भरे सगोरे या बर्तन रखने चाहिए।

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