
18अप्रैल / DPH News
शुक्रवार को लोक सभा में महिला आरक्षण कानून में संशोधन करने वाला बिल पास नहीं हो पाया। इसके साथ ही सरकार ने अन्य दो विधेयकों (परिसीमन विधेयक और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक) को आगे नहीं बढ़ाने का फैसला किया है।बता दें कि संविधान संशोधन विधेयक को पारित करने के लिए सदन में मौजूद और मतदान करने वाले सदस्यों के दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता होती है। मौजूदा संख्या के हिसाब से एनडीए के पास यह जरूरी आंकड़ा नहीं था, जिससे यह विधेयक पास नहीं हो पाया।सरकार ने तीन दिवसीय विशेष सत्र के दौरान ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ में संशोधन का प्रस्ताव रखा था, जिसके तहत लोक सभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने की व्यवस्था है। यदि यह संशोधन पास हो जाता, तो इसे 2029 के आम चुनाव से लागू किया जाना था।प्रस्तावित संशोधनों में लोकसभा सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर 850 करने का भी प्रावधान शामिल था, ताकि परिसीमन के बाद महिला आरक्षण को प्रभावी ढंग से लागू किया जा सके।हालांकि, विपक्ष ने शुरुआत से ही इन संशोधनों का विरोध किया। मतदान से पहले विपक्ष की एक बैठक हुई, जिसमें इसका विरोध करने का फैसला लिया गया। मतदान में विधेयक के पक्ष में 298 और विरोध में 230 वोट पड़े। एनडीए को इसे पारित कराने के लिए अन्य दलों का समर्थन या कुछ सदस्यों के मतदान से दूर रहने की जरूरत थी। लोकसभा में एनडीए के पास 293 सांसद (करीब 54%) हैं, जबकि विपक्ष के पास 233 सदस्य हैं।इस बीच, बीजद प्रमुख नवीन पटनायक ने ओडिशा के सांसदों से राज्य के राजनीतिक और आर्थिक हितों की रक्षा के लिए एकजुट होने की अपील की। उन्होंने कहा कि परिसीमन विधेयक से राज्य के हितों पर खतरा पैदा हो सकता है।AAP सांसद संजय सिंह ने संविधान संशोधन(131वां संशोधन) बिल के लोकसभा में पारित न होने पर कहा कि विपक्ष ने इस बिल को नकार कर प्रधानमंत्री मोदी की उत्तर-दक्षिण में फूट डालने की कोशिश को इस बिल को गिराकर नाकाम किया। 2023 के बिल में साफ-साफ कहा गया था कि पहले जनगणना होगी, फिर परिसीमन होगा और 2029 के बाद ही आरक्षण लागू होगा। हमने 543 सीटों पर तुरंत 33% आरक्षण की मांग की थी, लेकिन उन्होंने मना कर दिया। आज, एक बार फिर, वही मांग दोहराई जा रही है।
