
30 जून/ DPH NEWS
सार
राम मंदिर अयोध्या में चढ़ावे की चोरी ने संत समाज में एक बड़ी बहस छेड़ दी है। चड़ावा चोरी का यह एक नया मामला नहीं है पहले भी कई मंदिरों में चढ़ावे की चोरी की गई है
विस्तार
राम मंदिर अयोध्या में चढ़ावे की चोरी ने संत समाज में एक बड़ी बहस छेड़ दी है। चड़ावा चोरी का यह एक नया मामला नहीं है पहले भी कई मंदिरों में चढ़ावे की चोरी की गई है जानकारी के अनुसार अयोध्या के श्रीराम मंदिर में चढ़ावा चोरी के विवाद के बाद अब मंदिरों में श्रद्धालुओं द्वारा दिए जाने वाले चढ़ावे को लेकर पूरे देश में बहस छिड़ी हुई है। इधर, मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में भी कई मंदिर आस्था के केंद्र हैं, हालांकि शहर में कोई भी मंदिर शासन संधारित नहीं है, अधिकांश मंदिर ट्रस्ट, समितियों के हैं। यहां मंदिरों में जो दान पेटियों और रसीदों के माध्यम से चढ़ावा आता है, उससे मंदिरों की व्यवस्थाओं के साथ – साथ पुजारियों का वेतन, रख रखाव, समय – समय पर होने वाले उत्सवों पर खर्च किया जाता है।
दानपात्र खोलने की अलग – अलग मंदिरों में अलग – अलग व्यस्थाएं हैं।
कहीं जनता के बीच, कहीं बैंक रिप्रजेंटेटिव मंदिर समिति के पदाधिकारियों के बीच एक साल, छह और तीन महीने में दान पेटियां खोली जाती हैं। अब मंदिरों में क्यूआरकोड और डिजिटल माध्यम से भी चढ़ावा आता है, जो सीधे मंदिर के बैंक खाते में जमा हो जाता है।लेखा जोखा डिजिटल होना चाहिएअखिल भारतीय संत समिति के कार्यकारी अध्यक्ष महंत अनिलानंद का कहना है कि, अयोध्या में स्थित राम मंदिर में जनमानस के दान द्वारा दी गई राशि में गबन के दोषियों को कड़ी सजा देना चाहिए। हमारा संगठन भोपाल, एमपी समेत देश भर के मंदिरों के मठाधिपतियों, पुजारियों से आग्रह कर रहा है कि, सभी विभागों में जैसे ऑनलाइन और डिजिटलीकरण किया है, वैसे ही मंदिरों के चढ़ावे को भी ऑनलाइन और डिजिटल किया जाना चाहिए, ताकि रिकॉर्ड सुरक्षित और सार्वजनिक रूप से उपलब्ध हो सके।
