GK:क्या आप जानते हैं पृथ्वी पर 70% पानी कहां से आया

12 जुलाई/ DPH NEWS

सार

पृथ्वी का 70% से ज्यादा हिस्सा पानी से ढका हुआ है. यह जीवन के हर ज्ञात रूप के लिए जरूरी है. लेकिन इसके बावजूद भी सबसे बड़े वैज्ञानिक रहस्य में से एक यह रहा है कि हमारे ग्रह को इतना सारा पानी आखिर मिला कहां से. मौजूदा वैज्ञानिक रिसर्च के मुताबिक पृथ्वी का पानी काफी पुराना है.

विस्तार

क्या आप जानते हैं इस धरती पर इतना पानी कैसे आया और पानी ज्यादा और धरती कम क्यों है इसके पीछे की सच्चाई आज हम जानते हैं जानकारी के अनुसार पृथ्वी की सतह का 70% से ज्यादा हिस्सा पानी से ढका हुआ है. यह जीवन के हर ज्ञात रूप के लिए जरूरी है. लेकिन इसके बावजूद भी सबसे बड़े वैज्ञानिक रहस्य में से एक यह रहा है कि हमारे ग्रह को इतना सारा पानी आखिर मिला कहां से. मौजूदा वैज्ञानिक रिसर्च के मुताबिक पृथ्वी का पानी काफी पुराना है. यह लगभग 4.6 अरब से भी ज्यादा पुराना है. ऐसा माना जाता है कि इसका एक बड़ा हिस्सा सूरज और सौरमंडल के बनने से भी पहले ही मौजूद था. खगोलविदों का ऐसा कहना है कि पृथ्वी का लगभग आधा पानी इंटरस्टेलर बर्फ से आया है. ये बर्फ के छोटे कण थे जो सूरज के जन्म से पहले अंतरिक्ष में ठंडे मॉलेक्युलर बादलों में मौजूद थे. जब लगभग 4.6 अरब साल पहले सौरमंडल बनना शुरू हुआ तब इस पुरानी बर्फ का कुछ हिस्सा बच गया और आखिरकार उस सामग्री का हिस्सा बन गया जिससे पृथ्वी बनी.

जब पृथ्वी पहली बार बनी तो यह काफी गर्म और चट्टानी दुनिया थी जिसकी सतह पर काफी कम या फिर बिल्कुल भी तरल पानी नहीं था.

अगले कई मिलियन सालों के दौरान इस नए ग्रह पर कार्बन से भरपूर अनगिनत उल्कापिंड और क्षुद्रग्रह की बौछार हुई. इनमें बर्फ और हाइड्रेटेड खनिज थे. वैज्ञानिकों को यह मालूम पड़ा के अंतरिक्ष की इन कई पुरानी चट्टानों के अंदर फंसे पानी का रासायनिक संयोजन आज पृथ्वी के महासागरों में पाए जाने वाले पानी से काफी मिलता जुलता है.ऐसा कहा जाता है कि जब ग्रह बना तो कुछ पानी पहले से ही पृथ्वी के अंदर फंसा हुआ था. यह पानी मेंटल की गहराई में खनिजों के अंदर बंद रहा. जैसे-जैसे पृथ्वी ठंडी हुई जबरदस्त ज्वालामुखी गतिविधि ने इस फंसे हुए पानी को भाप के रूप में बाहर निकाला. वक्त के साथ बड़े पैमाने पर ज्वालामुखी विस्फोटों ने लगातार वायुमंडल में जलवाष्प छोड़ी. इससे ग्रह पर पानी की बढ़ती आपूर्ति में और बढ़ोतरी हुई.पृथ्वी के शुरुआती इतिहास के दौरान ज्वालामुखी से निकली भाप और उल्कापिंड से आए पानी ने नमी से भरपूर एक घना वायुमंडल बनाया. जैसे-जैसे ग्रह धीरे-धीरे ठंडा हुआ यह जलवाष्प संघनित होकर बादल बन गया. वैज्ञानिकों का ऐसा कहना है कि जोरदार बारिश हजारों या शायद लाखों सालों तक होती रही. बारिश का पानी धरती की सतह पर बने बड़े गड्ढों में जमा होता गया

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *