ट्रंप ने ईरान के खिलाफ प्रस्तावित सैन्य हमले को रोका, समझौता न होने पर अमेरिका कर सकता है’फुल और लार्ज स्केल असॉल्ट’

सार

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि उन्होंने ईरान पर प्रस्तावित अमेरिकी सैन्य हमला फिलहाल रोक दिया है। ट्रंप के मुताबिक, यह फैसला कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के शीर्ष नेताओं की अपील के बाद लिया गया।

19 मई/ DPH NEWS

विस्तार

मध्य पूर्व एक बार फिर बड़े सैन्य टकराव के बेहद करीब पहुंच गया था, लेकिन आखिरी वक्त पर हालात बदल गए। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि उन्होंने ईरान पर प्रस्तावित अमेरिकी सैन्य हमला फिलहाल रोक दिया है। ट्रंप के मुताबिक, यह फैसला कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के शीर्ष नेताओं की अपील के बाद लिया गया।ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर एक लंबा बयान जारी करते हुए कहा कि कतर के अमीर शेख तमीम बिन हमद अल थानी, सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (MBS) और UAE के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान ने उनसे सैन्य कार्रवाई टालने की अपील की थी, क्योंकि ईरान के साथ गंभीर बातचीत जारी है।डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिका की सैन्य कार्रवाई ‘अगले दिन’ के लिए तय थी, लेकिन खाड़ी देशों के नेताओं ने हस्तक्षेप कर उन्हें कुछ समय देने के लिए कहा। ट्रंप के अनुसार, इन देशों को उम्मीद है कि तेहरान के साथ किसी समझौते तक पहुंचा जा सकता है।ट्रंप ने अपने बयान में कहा कि उन्हें ईरान के खिलाफ प्रस्तावित सैन्य हमले को रोकने के लिए कहा गया और उन्होंने अपने सहयोगी देशों के सम्मान में ऐसा किया। हालांकि उन्होंने यह भी साफ कर दिया कि अगर बातचीत विफल होती है तो अमेरिका बड़े स्तर की सैन्य कार्रवाई के लिए पूरी तरह तैयार है।ट्रंप ने कहा कि उन्होंने अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ, ज्वाइंट चीफ्स चेयरमैन जनरल डेनियल कैन और अमेरिकी सेना को पूरी तरह तैयार रहने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि ईरान के साथ समझौता नहीं हुआ तो अमेरिका ‘फुल और लार्ज स्केल असॉल्ट’ कर सकता है।।

ट्रंप ने दोहराया कि अमेरिका किसी भी कीमत पर ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देगा

उन्होंने कहा कि प्रस्तावित समझौते का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ईरान के पास न्यूक्लियर वेपन न हों। इस पूरे घटनाक्रम में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि कतर, सऊदी अरब और UAE जैसे खाड़ी देश एक साथ अमेरिका के पास पहुंचे। सामान्य तौर पर इन देशों के ईरान को लेकर अलग-अलग रणनीतिक रुख रहे हैं, लेकिन इस बार तीनों देश क्षेत्रीय युद्ध रोकने के लिए एकजुट दिखाई दिए।दरअसल, पिछले कुछ महीनों से ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव का असर सीधे खाड़ी देशों पर पड़ रहा है। ईरान पहले भी यह आरोप लगा चुका है कि अमेरिकी सहयोगी देश उसके खिलाफ सैन्य गतिविधियों को समर्थन दे रहे हैं। वहीं खाड़ी देशों को डर है कि यदि अमेरिका और ईरान के बीच सीधा युद्ध छिड़ता है तो पूरा मध्य पूर्व अस्थिर हो सकता है।

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