

15 जून/ DPH NEWS
सार
प्रदूषण एक बहुत ही बड़ी समस्या है जिस का सेहत पर बहुत ही बड़ा प्रभाव पड़ता है। तो लिए आज हम जानते हैं की दुनिया का सबसे प्रदूषित राज्य कौन सा है जानकारी अनुसारवायु प्रदूषण आज दुनिया की सबसे बड़ी समस्याओं में से एक है. यह केवल पर्यावरण का मुद्दा नहीं है. यह सीधे इंसान की सेहत से जुड़ा हुआ है. खराब हवा फेफड़ों, दिल, दिमाग और बच्चों के विकास पर बुरा असर डालती है. इसी कारण हर साल दुनिया के देशों की एयर क्वालिटी पर रिपोर्ट जारी होती है, जिससे हम समझ सकें
विस्तार
प्रदूषण एक बहुत ही बड़ी समस्या है जिस का सेहत पर बहुत ही बड़ा प्रभाव पड़ता है। तो लिए आज हम जानते हैं की दुनिया का सबसे प्रदूषित राज्य कौन सा है जानकारी अनुसारवायु प्रदूषण आज दुनिया की सबसे बड़ी समस्याओं में से एक है. यह केवल पर्यावरण का मुद्दा नहीं है. यह सीधे इंसान की सेहत से जुड़ा हुआ है. खराब हवा फेफड़ों, दिल, दिमाग और बच्चों के विकास पर बुरा असर डालती है. इसी कारण हर साल दुनिया के देशों की एयर क्वालिटी पर रिपोर्ट जारी होती है, जिससे हम समझ सकें कि दिक्कत कहां है और इससे निपटने का समय आ गया है. साल 2025 की रिपोर्ट के अनुसार दुनिया का सबसे प्रदूषित देश पाकिस्तान हैविश्व पर्यावरण दिवस के बहाने आइए समझते हैं कि पड़ोसी बांग्लादेश और तजाकिस्तान प्रदूषण के मामले में दुनिया में किस नंबर पर हैं? भारत की क्या स्थिति है और टॉप 10 देश कौन-कौन हैं?साल 2025 की रिपोर्ट कहती है,
दुनिया का सबसे प्रदूषित देश पाकिस्तान है आईए जानते हैं
पाकिस्तान का औसत PM2.5 स्तर सबसे अधिक दर्ज किया गया है. बांग्लादेश दूसरे और ताजिकिस्तान तीसरे स्थान पर रहा. यानी अगर केवल अव्वल तीन देशों का नाम लेना होगा तो क्रमवार पाकिस्तान, बांग्लादेश और ताजिकिस्तान होंगे. भारत इन तीनों के बाद नहीं, बल्कि वैश्विक सूची में छठे नंबर पर आता है.प्रदूषण को समझने के लिए PM2.5 को समझना जरूरी है. यह हवा में मौजूद बहुत छोटे कण होते हैं. इनका आकार 2.5 माइक्रॉन या उससे कम होता है. ये इतने छोटे होते हैं कि हमारी सांस के साथ सीधे फेफड़ों में पहुंच जाते हैं. कुछ कण खून तक में मिल सकते हैं. इसी कारण PM2.5 को बहुत खतरनाक माना जाता है. जब किसी देश का वार्षिक PM2.5 स्तर अधिक होता है, तो वह देश ज्यादा प्रदूषित माना जाता है.पाकिस्तान के सबसे प्रदूषित देश बनने के पीछे कई कारण हैं. पहला कारण है तेजी से बढ़ता शहरीकरण.शहर बढ़ रहे हैं, लेकिन साफ हवा के लिए जरूरी ढांचा उतनी तेजी से नहीं बढ़ रहा. दूसरा कारण है वाहनों का धुआं. पुराने वाहन, डीजल इंजन और ट्रैफिक जाम हवा को खराब करते हैं. तीसरा कारण है उद्योग और ईंधन. फैक्ट्रियों से निकलने वाला धुआं बड़ी समस्या है. कई क्षेत्रों में कोयला और दूसरे गंदे ईंधन का उपयोग अभी भी अधिक होता है. सड़कों की धूल, निर्माण स्थल और खुले में पड़ा मलबा भी हवा में महीन कण बढ़ाते हैं. कई बार ठंडी हवा, धुंध और स्थिर मौसम प्रदूषक कणों को नीचे ही रोक लेते हैं. इससे हवा लंबे समय तक खराब बनी रहती है.
