
1 जुलाई/ DPH NEWS
सार
क्या आपने किसी किन्नर को विधायक बनते हुए देखा है तो आईए जानते हैं भारत की राजनीति में कई बार ऐसे मोड़ आए हैं, जिन्होंने समाज की सोच को पूरी तरह से बदल दिया. ऐसा ही एक ऐतिहासिक पल साल 2000 में आया, जब मध्य प्रदेश की विधानसभा में एक ऐसी शख्सियत ने कदम रखा
विस्तार
आपने किसी किन्नर को विधायक बनते हुए देखा है तो आईए जानते हैं भारत की राजनीति में कई बार ऐसे मोड़ आए हैं, जिन्होंने समाज की सोच को पूरी तरह से बदल दिया. ऐसा ही एक ऐतिहासिक पल साल 2000 में आया, जब मध्य प्रदेश की विधानसभा में एक ऐसी शख्सियत ने कदम रखाकिन्नर को अक्सर अपने सड़कों पर मांगते हुए या किसी खुशी के त्यौहार में नाचते हुए तो जरूर देखा होगा लेकिन क्या आपने किसी किन्नर को विधायक बनते हुए देखा है तो आईए जानते हैं भारत की राजनीति में कई बार ऐसे मोड़ आए हैं, जिन्होंने समाज की सोच को पूरी तरह से बदल दिया. ऐसा ही एक ऐतिहासिक पल साल 2000 में आया, जब मध्य प्रदेश की विधानसभा में एक ऐसी शख्सियत ने कदम रखा, जिसने सदियों से हाशिए पर रहे किन्नर समाज को एक नई पहचान दी. वह नाम था
शबनम ‘मौसी’. वे भारत की पहली किन्नर विधायक बनीं. उन्होंने चुनाव में बड़े-बड़े नेताओं और पुरानी पार्टियों को ऐसी पटखनी दी कि पूरा देश देखता रह गया.
उनकी यह जीत समाज के उस हिस्से की आवाज थी जिसे लोग हमेशा मुख्यधारा से अलग रखते थे. इस जीत ने देश के बड़े-बड़े राजनीतिक पंडितों को सोचने पर मजबूर कर दिया था. शबनम मौसी का जन्म एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था और उनके पिता पुलिस में अफसर थे!हालांकि, जब परिवार को पता चला कि वो एक किन्नर हैं, तो समाज और लोकलाज के डर से घरवालों ने उन्हें बहुत छोटी उम्र में ही खुद से अलग कर दिया. इसके बाद शबनम ने किन्नरों के बीच रहकर ही अपनी पूरी जिंदगी काटी और समाज के सारे ताने और दुख-दर्द झेले. देश की पहली ट्रांसजेंडर विधायक रहीं शबनम मौसी आठवीं तक पढ़ी हैं. इसके अलावा उन्हें हिंदी, अंग्रेजी और अन्य भाषाओं की भी जानकारी है. समाज के बीच रहने की वजह से वे आम लोगों की रोजमर्रा की समस्याओं और जमीनी हकीकत को बहुत गहराई से समझती थीं. लेकिन उन्होंने अपनी जिंदगी में कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि एक दिन वे उस राज्य विधानसभा के भीतर बैठेंगी जहां प्रदेश के लिए नीतियां और कानून तय किए जाते हैं।
