GK:क्या आपने कभी देखा है दुनिया का सबसे बड़ा फूल

2 जुलाई/ DPH NEWS

सार

फूलों का हमारी जिंदगी में एक बहुत बड़ा महत्व है फूलों को आस्था और श्रद्धा का प्रतीक भी माना जाता है और फूल जो हर एक शख्स को मोह लेते हैं और फूलों को देखना लगभग सभी को अच्छा लगता है लेकिन आपने बहुत सारे फूल देखे होंगे लेकिन क्या आप यह जानते हैं कि एक फूल ऐसा भी है जो दुनियाभर में फूलों की करीब 4 लाख किस्‍में पाई जाती हैं.

विस्तार

फूलों का हमारी जिंदगी में एक बहुत बड़ा महत्व है फूलों को आस्था और श्रद्धा का प्रतीक भी माना जाता है और फूल जो हर एक शख्स को मोह लेते हैं और फूलों को देखना लगभग सभी को अच्छा लगता है लेकिन आपने बहुत सारे फूल देखे होंगे लेकिन क्या आप यह जानते हैं कि एक फूल ऐसा भी है जो दुनियाभर में फूलों की करीब 4 लाख किस्‍में पाई जाती हैं. इनमें रैफ्लेशिया अर्नोल्डी बहुत खास है. यह दुनिया का सबसे बड़ा फूल है. इसका नामकरण ब्र‍िटेन के सर्जन जोसेफ अर्नोल्‍ड के नाम पर रखा गया है. 1818 में वो फूल के नमूने का अध्‍ययन करने वाले पहले इंसान थे. अपने विशाल आकार के कारण इसे दुनिया का सबसे बड़ा फूल कहा गया

रैफ्लेशिया अर्नोल्डी का व्यास 1 मीटर या 3 फीट 3 इंच तक हो सकता है. यह 11 किलोग्राम तक भारी हो सकता है.

इसमें पांच लाल-भूरे रंग की पंखुड़‍ियां होती हैं. इन पर सफेद धब्‍बे होते हैं. इसका जीवन चक्र 1 साल तक का होता है. अगर यह एक बार खिल जाता है तो केवल 5 से 7 दिनों तक वैसा रहता है. फ‍िर यह खत्‍म हो जाता है.कहां पाया जाता है… रैफ्लेशिया अर्नोल्डी इंडोनेशिया के वर्षावनों में, विशेषकर बोर्नियो और सुमात्रा द्वीप में पाया जाता है. इसकी पंखुड़ियों से निकलने वाली दुर्गंध के कारण इसे शव फूल भी कहते हैं. यह अपनी दुर्गंध से मक्‍ख‍ियों और दूसरे कीटों को आकर्षित करता है. यह जंगल के उस हिस्‍से में उगता है जहां नमीं ज्‍यादा और धूप कम पहुंचती है.क्‍यों आती है गंध… इस फूल की खूबी है कि इसके पास से सड़े हुए मांस जैसी गंध आती है. यह फूल जानवरों का मांस खाने वाली मक्‍ख‍ियाें और कीटों को आकर्ष‍ित करता है. इसके पास से आने वाली गंध की वजह डाइमिथाइल डाइसल्फाइड और डाइमिथाइल ट्राइसल्फाइड जैसे रसायन हो सकते हैं, जो दुर्गंध पैदा करते हैं. जड़, पत्‍ती और तना नहीं… इस फूल में पत्‍त‍ि‍यां, जड़ और तना नहीं होता. यह किसी पेड़ से जुड़कर पैदा होता है और ऊर्जा और पोषक तत्‍व उसी पेड़ से हासिल करता है. दिलचस्‍प बात है कि इसे दक्ष‍िण पूर्व एशिया के वर्षावनों के अलावा कहीं नहीं उगाया जा सकता.

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