
14 जुलाई/ DPH NEWS
सार
ऐसे ऐसे राज हुए हैं जिनकी सैकड़ो के हिसाब से रानियां थी तो लिए आज जानते हैं उसे राज्य के बारे में आज के समय में जहां एक शादी के अलावा दूसरी शादी कर लेने पर लोग चर्चा का विषय बन जाते हैं, वहीं आपको जानकर हैरानी होगी कि एक राजा ऐसा भी था जिसने एक नहीं, दो नहीं, कम से कम 375 बार शादी की थी.
विस्तार
पहले के समय में ऐसे राज हुए हैं जिनको शादियों का शौक था। आजकल महंगाई के दौर में एक बच्चे की परवरिश करनी मुश्किल है लेकिन ऐसे ऐसे राज हुए हैं जिनकी सैकड़ो के हिसाब से रानियां थी तो लिए आज जानते हैं उसे राज्य के बारे में आज के समय में जहां एक शादी के अलावा दूसरी शादी कर लेने पर लोग चर्चा का विषय बन जाते हैं, वहीं आपको जानकर हैरानी होगी कि एक राजा ऐसा भी था जिसने एक नहीं, दो नहीं, कम से कम 375 बार शादी की थी. जी हां, आपने एकदम सही सुना. हम बात कर रहे हैं अवध के आखिरी नवाब वाजिद अली शाह की. यह वही राजा थे जो कला, संगीत और कथक नृत्य के बहुत बड़े प्रेमी माने जाते थे. कहा जाता है कि वाजिद अली शाह ने अपनी जिंदगी में करीब 375 बेगमों से शादी की थी. जितनी यह बात सुनने में दिलचस्प लगती है, उतनी ही इसके पीछे की कहानी भी उतनी ही खास है.बेगमों की संख्या जितनी हैरान करती है, उतनी ही हैरानी आपको यह बात जानकर होगी कि इन शादियों के पीछे एक खास तरीका था, जिसे मुताह कहा जाता है. बता दें कि मुताह एक तरह की समय-सीमा वाली शादी होती थी, जिसमें दोनों पक्ष पहले से तय कर लेते थे कि यह रिश्ता कितने समय तक चलेगा. इसी तरीके से वाजिद अली शाह ने कई महिलाओं से निकाह किया, चाहे वह महल की नौकरानी हो या कोई और साधारण औरत.इसके अलावा सबसे दिलचस्प बात यह है कि वाजिद अली शाह की सभी बीवियां एक बराबर नहीं मानी जाती थीं. मुताह से शादी करने वाली महिलाओं को शादी खत्म होने के बाद अपने गहने और कपड़े तक वापस करने पड़ते थे.उनकी बीवियों की तीन श्रेणियां तय थीं. एक, जिन्होंने नवाब के बच्चों को जन्म दिया, उन्हें महल का ऊंचा दर्जा दिया जाता था और वे पर्दे में रहती थीं. दूसरी, जिन्होंने बच्चों को जन्म नहीं दिया, उन्हें बेगम कहा जाता था. और सबसे नीचे का दर्जा खिलावती का होता था. ये महिलाएं घर के नौकरों जैसा काम करती थीं, लेकिन शादी के बंधन में नवाब से जुड़ी रहती थीं. वाजिद अली शाह के बारे में एक और सबसे खास बात थी कि उन्हें काले रंग की बीवियां बहुत पसंद थीं और उन्हें अफ्रीकी अंगरक्षकों के बीच रहना भी पसंद था.
