
08 जुलाई/DPH NEWS
सार
भारत में धार्मिक संस्थानों का प्रबंधन अलग-अलग धर्म के हिसाब से काफी अलग-अलग होता है. हालांकि वक्फ बोर्ड और मंदिर ट्रस्ट दोनों ही धार्मिक संपत्तियों और धर्मार्थ संपत्तियों के प्रबंधन के लिए जिम्मेदार होते हैं लेकिन उनका कानूनी ढांचा, प्रशासनिक संरचना, संपत्ति का मालिकाना हक और फैसले लेने की प्रक्रिया एक जैसी नहीं होती.सबसे बुनियादी अंतर कानूनी ढांचे में है.
विस्तार
भारत में धार्मिक संस्थानों का प्रबंधन अलग-अलग धर्म के हिसाब से काफी अलग-अलग होता है. हालांकि वक्फ बोर्ड और मंदिर ट्रस्ट दोनों ही धार्मिक संपत्तियों और धर्मार्थ संपत्तियों के प्रबंधन के लिए जिम्मेदार होते हैं लेकिन उनका कानूनी ढांचा, प्रशासनिक संरचना, संपत्ति का मालिकाना हक और फैसले लेने की प्रक्रिया एक जैसी नहीं होती.सबसे बुनियादी अंतर कानूनी ढांचे में है. वक्फ बोर्ड वक्फ अधिनियम 1995 के तहत काम करते हैं. यह एक केंद्रीय कानून है और पूरे देश में वक्फ संपत्तियों को कंट्रोल करता है. वहीं दूसरी तरफ मंदिर ट्रस्ट राज्य विशिष्ट पब्लिक ट्रस्ट अधिनियम या फिर अलग-अलग मंदिरों और मंदिर बोर्ड के प्रबंधन के लिए बनाए गए खास कानून के तहत काम करते हैं. वक्फ प्रणाली एक केंद्रीकृत मॉडल को अपनाती है.
हर राज्य में एक राज्य वक्फ बोर्ड होता है. यह बोर्ड अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाली सभी पंजीकृत वक्फ संपत्तियों की देख-रेख करता है.
इसके उलट हिंदू मंदिरों के लिए कोई भी एक राष्ट्रव्यापी शासी निकाय नहीं है. आमतौर पर हर मंदिर का प्रबंधन उसके अपने स्वतंत्र ट्रस्ट द्वारा ही किया जाता है.मालिकाना हक की संरचना भी बिल्कुल अलग-अलग है. वक्फ संपत्ति हमेशा के लिए अल्लाह को समर्पित होती हैं और उन्हें बेचा नहीं जा सकता. संपत्ति हमेशा वक्फ के रूप में बनी रहती है.
दूसरी तरफ मंदिर की संपत्तियां या तो मुख्य देवता के नाम पर होती है या फिर मंदिर का प्रबंधन करने वाले ट्रस्ट के नाम पर.
मस्जिदों और दूसरे वक्फ संस्थाओं के रोजमर्रा के प्रबंधन का काम मुतव्वली संभालता है. इस बोर्ड नियुक्त या फिर मान्यता देता है. यह डिड के मुताबिक संपत्ति की सुरक्षा और प्रबंधन के लिए जिम्मेदार होता है लेकिन उसका मालिक नहीं होता. इसी के साथ मंदिर का प्रशासन आमतौर पर ट्रस्टियों, पुजारियों या फिर कुछ बड़े मंदिरों में प्रमुख कार्यकारी अधिकारी द्वारा चलाया जाता है. प्रशासनिक जिम्मेदारियों के साथ-साथ वे मंदिर की परंपराओं के मुताबिक धार्मिक अनुष्ठानों और पूजा पाठ की देख-रेख भी करते हैं.
