कत्ल केस में मिली पैरोल में फरार एक आरोपी बन गया एक्टर, 12 साल बाद किया काबू

अहमदाबाद/ DPH NEWS

सार

12 साल पहले हत्या के एक मामले में पैरोल मिलने के बाद फ़रार हो गया था और फिर एक एक्टर बन गया था.पुलिस के मुताबिक, हेमंत मोदी एक वकील है, जिसे 2008 में हत्या के एक मामले में उम्रकैद की सज़ा मिली थी.

विस्तार

अहमदाबाद से एक हैरानी जनक मामला सामने आया है जानकारी अनुसार क्राइम ब्रांच ने हाल ही में एक ऐसे अपराधी को गिरफ़्तार किया है, जो 12 साल पहले हत्या के एक मामले में पैरोल मिलने के बाद फ़रार हो गया था और फिर एक एक्टर बन गया था.पुलिस के मुताबिक, हेमंत मोदी एक वकील है, जिसे 2008 में हत्या के एक मामले में उम्रकैद की सज़ा मिली थी. छह साल बाद पैरोल मिलने पर वह भाग गया.वह मुंबई जाकर एक्टर बन गया और कई फ़िल्मों, टीवी सीरियल्स और वेब सीरीज में काम कर चुका था.अब जब वह अहमदाबाद में ही एक सीरियल के लिए शूटिंग कर रहा था, तब जाल बिछाकर उसे गिरफ़्तार कर लिया.इस मामले को समझने के लिए बीबीसी गुजराती ने क्राइम ब्रांच के अधिकारियों और हेमंत मोदी के परिचित लोगों से बात की.इससे पता चला कि इतने सालों से फ़रार अपराधी पुलिस के चंगुल में आया कैसे?अहमदाबाद क्राइम पुलिस इंस्पेक्टर पीएम धाकड़ा ने कहा, “जब हम सीरियल ‘मोटी बानी नानी बहू’ में काम करने वाले एक्टर को गिरफ़्तार करने गए तो उनका अभिनय इतना शानदार था कि उन्हें पहचानना मुश्किल था. लेकिन उसकी गिरफ़्तारी के समय दर्ज किए गए शरीर पर मौजूद निशानों का मिलान करने के बाद उससे कड़ी पूछताछ की गई. आखिर उसने कबूल कर लिया कि वह वही हेमंत मोदी है जो 12 साल से पुलिस की गिरफ्त से भाग रहा था और बाद में अभिनेता बन गया था.”केस के तथ्यों के अनुसार हत्या से पहले हेमंत मोदी अहमदाबाद के नरोदा के सैजपुर बोघा में दासकी चॉल में रह रहे थे.

12 जून, 2005 को अपने एक पड़ोसी की हत्या की थी

12 जून, 2005 को अपने एक पड़ोसी के साथ झगड़े के बाद, उसने अपने भाई और दोस्तों के साथ मिलकर अपने पड़ोसी के दोस्त नरेंद्र ताम्बले उर्फ नन्नो की हत्या कर दी थी.चूंकि हेमंत मोदी खुद एक वकील थे, इसलिए उन्होंने अपने साथ गिरफ़्तार किए गए सात लोगों का केस लड़ा. लेकिन 2008 में तीन साल तक चले मुकदमे के बाद कोर्ट ने हेमंत मोदी समेत सभी सातों लोगों को उम्रकैद की सजा सुनाई.वकील होने के नाते जेल मैनुअल से वाकिफ़ हेमंत ने तत्कालीन जेलर केशव कुमार के ख़िलाफ़ याचिका दायर की और शिकायत की कि वह डिप्रेशन में हैं. बाद में उन्हें अहमदाबाद की साबरमती जेल से मेहसाणा जेल में स्थानांतरित कर दिया गया.अदालत के फैसले के छह साल बाद मेहसाणा जेल में बंद हेमंत को गुजरात उच्च न्यायालय से 30 दिन की पैरोल मिली. पैरोल के बाद वह फ़रार हो गया और एक अभिनेता के रूप में अपना करियर बनाने लगा.इंस्पेक्टर पीएम धाकड़ा ने बताया कि हेमंत पैरोल मिलने के बाद वहां से भाग गया था. कुछ समय तक अलग-अलग जगहों पर रहने के बाद वह एक्टिंग के क्षेत्र में मौके की तलाश में मुंबई चला गया.वह कहते हैं, “वहां उन्हें एक जाने-माने अभिनेता के साथ साइड रोल मिलने लगे, उन्हें नाटकों में काम मिलने लगा. इस दौरान उन्होंने अपना नाम बदलकर स्वप्निल मोदी कर लिया. उन्होंने अपना हेयरस्टाइल भी बदला. उन्होंने फ़िल्मों, टीवी सीरियल्स और वेब सीरीज में काम करना शुरू कर दिया.

साउथ फिल्मों के साथ-साथ उन्होंने गुजराती फिल्मों में भी काम किया,

लेकिन किसी ने उन्हें नहीं पहचाना, इसलिए उनकी हिम्मत बढ़ती गई. इस तरह उन्होंने गुजराती फिल्मों के साथ-साथ सीरियल्स में भी साइड रोल करने लगे.”पुलिस के मुताबिक़, अहमदाबाद लौटने के बाद उसने अहमदाबाद के कोट इलाके में एक मकान किराए पर लिया और सीरियल ‘मोटी बानी नानी बहू’ में काम करने लगा.पुलिस के अनुसार हेमंत जब भी अहमदाबाद आता था तो अपने घर के आसपास के लोगों को बताता था कि वह एक बड़ा एक्टर है. लेकिन क्षेत्र के एक सामाजिक कार्यकर्ता को उसकी गतिविधियों पर संदेह हो गया; क्योंकि हेमंत ने अपना आधार कार्ड और अन्य सबूत अपने मकान मालिक को नहीं दिए थे.

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