GK:जानिए,कैसे बनता है विदेशियों के लिए OCI कार्ड

21 अप्रैल/DPH News

भारत सरकार ने श्रीलंका में रह रहे भारतीय मूल के तमिल समुदाय के लोगों के लिए एक अहम फैसला लिया है. तमिलनाडु में चल रहे विधान सभा चुनावों के बीच यह फैसला महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है. देश के उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने अपने श्रीलंका दौरे पर घोषणा की है कि भारतीय मूल के तमिल समुदाय के लोगों को ओवरसीज सिटीजनशिप ऑफ इंडिया (OCI) की पात्रता चौथी पीढ़ी से बढ़ाकर छठी पीढ़ी तक कर दी गई है.भारत सरकार के इस फैसले के बहाने जानते हैं कि आखिर ओवरसीज सिटीजनशिप ऑफ इंडिया (OCI) किसे दी जाती है? इसके क्या-क्या फायदे मिलते हैं? क्यों और कैसे मिलता है यह कार्ड भारत आने वाले कुछ विदेशी नागरिक OIC कार्ड का नाम लेते हैं. जबकि, इसका सही नाम OCI कार्ड है. इसका पूरा नाम ओवरसीज सिटीजनशिप ऑफ इंडिया है. यह भारतीय पासपोर्ट नहीं है. यह भारतीय नागरिकता भी नहीं है. यह एक लंबी अवधि की यात्रा और निवास सुविधा है. यह सुविधा उन लोगों के लिए है जिनका भारत से वंश, परिवार या विवाह के जरिए संबंध बनता है. इसलिए हर विदेशी पर्यटक को यह कार्ड नहीं मिलता.भारत से बाहर बड़ी संख्या में भारतीय मूल के लोग रहते हैं. वे अपने परिवार से मिलने के लिए आते हैं. वे पढ़ाई करते हैं. काम करते हैं. बाहर रहकर निवेश करते हैं. पहले उन्हें बार-बार वीजा लेना पड़ता था. हर बार कागजी काम ज्यादा होता था. समय भी लगता था. इसी परेशानी को कम करने के लिए OCI कार्ड जैसी सुविधा सरकार लेकर लाई. मकसद था प्रवासी समुदाय का संबंध मजबूत रहे. उनकी यात्रा आसान हो. लंबी अवधि की योजना बन सके.बार-बार वीजा की जरूरत कम होती है. कई यात्राओं में दोबारा आवेदन नहीं करना पड़ता. लंबे समय तक भारत में रहना सरल हो जाता है. कई मामलों में अलग रजिस्ट्रेशन की जरूरत नहीं रहती. एंट्री और इमिग्रेशन प्रक्रिया आम तौर पर आसान लगती है. दस्तावेज स्पष्ट रहते हैं. पढ़ाई और काम से जुड़ी कई सुविधाएं एनआरआई जैसी मिलती हैं। यद्यपि, नियम संबंधित संस्था और कोर्स पर भी निर्भर होते हैं. बैंकिंग, किराया, सिम, केवाईसी जैसे काम कई जगह आसान हो जाते हैं.OCI रखने से भी कई अधिकार नहीं मिलते. वोट देने का अधिकार नहीं होता. सरकारी नौकरी और संवैधानिक पद नहीं मिलते. कुछ संवेदनशील क्षेत्रों में जाने के लिए परमिट लग सकता है. पत्रकारिता, शोध, मिशनरी काम जैसे मामलों में विशेष अनुमति लग सकती है. कृषि भूमि, फार्म हाउस, प्लांटेशन जैसी संपत्ति पर आम तौर पर रोक रहती है.यह कार्ड आम तौर पर निम्न श्रेणी के लोगों को मिल सकता है. जिनका जन्म भारत में हुआ हो, या जिनके माता-पिता/दादा-दादी का संबंध भारत से रहा हो. जिनके पास भारतीय मूल का वैध प्रमाण हो. विदेशी नागरिक जो भारतीय नागरिक या OCI धारक के पति या पत्नी हों. इसके लिए विवाह और समय संबंधी शर्तें होती हैं. कुछ देशों और मामलों में सुरक्षा कारणों से अलग नियम लागू हो सकते हैं. इसलिए आवेदन से पहले सरकारी निर्देश पढ़ना जरूरी है.इसके लिए ऑनलाइन फॉर्म भरा जाता है. इसमें पासपोर्ट, पता, परिवार, जन्म, और अन्य विवरण आते हैं. फोटो और सिग्नेचर तय नियम के अनुसार अपलोड किए जाते हैं. कुछ जरूरी दस्तावेज लगाए जाते हैं. जैसे, जन्म प्रमाण, पुराने भारतीय पासपोर्ट की प्रति, माता-पिता के कागज, विवाह प्रमाण. फीस भुगतान होता है. देश के अनुसार फीस अलग हो सकती है. वेरिफिकेशन होता है. दूतावास या संबंधित कार्यालय कागज जांचते हैं. जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त कागज मांगते हैं. मंजूरी मिलने पर OCI स्टेटस जारी होता है. फिर कार्ड या ई-डॉक्यूमेंट मिलता है. यात्रा के समय पासपोर्ट और OCI साथ रखना होता है.OCI कार्ड बनना सिर्फ प्लास्टिक कार्ड छपना नहीं है. इसके पीछे कई चरण होते हैं. पहले आपकी पहचान तय होती है. फिर आपके दस्तावेजों से भारतीय मूल का संबंध जांचा जाता है. उसके बाद सुरक्षा और रिकॉर्ड मिलान होता है. मंजूरी के बाद आपका यूनिक नंबर बनता है. आपका डेटा सिस्टम में दर्ज होता है. फिर फोटो और विवरण के साथ कार्ड प्रिंट या डिजिटल फॉर्म में जारी होता है. कई जगह कार्ड के साथ स्टिकर या अलग दस्तावेज भी मिलते थे. भारत में विदेशियों को रहने के लिए कैसे मिलता है OCI कार्ड? श्रीलंका में तमिल समुदाय के लिए हुआ बड़ा ऐलानOCI Card Benefits: श्रीलंका में रहने वाले भारतीय मूल के तमिल समुदाय के लिए बड़ा ऐलान हुआ है. देश के उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने अपने श्रीलंका यात्रा के दौरान घोषणा की है कि भारतीय मूल के तमिल समुदाय के लोगों को ओवरसीज सिटीजनशिप ऑफ इंडिया (OCI) की पात्रता चौथी पीढ़ी से बढ़ाकर छठी पीढ़ी तक कर दी गई है. जानिए, क्या है OCI कार्ड, किसे-कैसे मिलता है, क्या हैं इसके अधिकार और फायदे?भारत में विदेशियों को रहने के लिए कैसे मिलता है OCI कार्ड? श्रीलंका में तमिल समुदाय के लिए हुआ बड़ा ऐलानदेश के उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने श्रीलंका यात्रा के दौरान घोषणा की है कि भारतीय मूल के तमिल समुदाय के लोगों को OCI की पात्रता चौथी पीढ़ी से बढ़ाकर छठी पीढ़ी तक कर दी गई है.दिनेश पाठकदिनेश पाठकUpdated on: Apr 20, 2026 5:23 PM ISTShareभारत सरकार ने श्रीलंका में रह रहे भारतीय मूल के तमिल समुदाय के लोगों के लिए एक अहम फैसला लिया है. तमिलनाडु में चल रहे विधान सभा चुनावों के बीच यह फैसला महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है. देश के उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने अपने श्रीलंका दौरे पर घोषणा की है कि भारतीय मूल के तमिल समुदाय के लोगों को ओवरसीज सिटीजनशिप ऑफ इंडिया (OCI) की पात्रता चौथी पीढ़ी से बढ़ाकर छठी पीढ़ी तक कर दी गई है.भारत सरकार के इस फैसले के बहाने जानते हैं कि आखिर ओवरसीज सिटीजनशिप ऑफ इंडिया (OCI) किसे दी जाती है? इसके क्या-क्या फायदे मिलते हैं? क्यों और कैसे मिलता है यह कार्ड?ये भी पढ़ेंट्रंप ने ईरान के साथ बढ़ाया सीजफायर, होर्मुज पर जारी रहेगी नाकाबंदी, तेहरान के प्रस्ताव का इंतजारVIDEO: एमएस धोनी के सामने ऐसी गलती! CSK के खिलाड़ी को प्रैक्टिस में मिला बड़ा सबककेरलम की पटाखा यूनिट में भीषण ब्लास्ट, 6 लोगों की मौत, 40 घायल… रेस्क्यू जारीक्या है OCI कार्ड?भारत आने वाले कुछ विदेशी नागरिक OIC कार्ड का नाम लेते हैं. जबकि, इसका सही नाम OCI कार्ड है. इसका पूरा नाम ओवरसीज सिटीजनशिप ऑफ इंडिया है. यह भारतीय पासपोर्ट नहीं है. यह भारतीय नागरिकता भी नहीं है. यह एक लंबी अवधि की यात्रा और निवास सुविधा है. यह सुविधा उन लोगों के लिए है जिनका भारत से वंश, परिवार या विवाह के जरिए संबंध बनता है. इसलिए हर विदेशी पर्यटक को यह कार्ड नहीं मिलता.इस कार्ड की जरूरत क्यों पड़ी?भारत से बाहर बड़ी संख्या में भारतीय मूल के लोग रहते हैं. वे अपने परिवार से मिलने के लिए आते हैं. वे पढ़ाई करते हैं. काम करते हैं. बाहर रहकर निवेश करते हैं. पहले उन्हें बार-बार वीजा लेना पड़ता था. हर बार कागजी काम ज्यादा होता था. समय भी लगता था. इसी परेशानी को कम करने के लिए OCI कार्ड जैसी सुविधा सरकार लेकर लाई. मकसद था प्रवासी समुदाय का संबंध मजबूत रहे. उनकी यात्रा आसान हो. लंबी अवधि की योजना बन सके.Oci Card Eligibility Benefits How To Apply India Extends In Sri Lanka To Sixth Generation (1)OCI कार्ड होल्डर को वोट देने का अधिकार नहीं मिलता.इस कार्ड से क्या फायदे मिलते हैं?बार-बार वीजा की जरूरत कम होती है. कई यात्राओं में दोबारा आवेदन नहीं करना पड़ता. लंबे समय तक भारत में रहना सरल हो जाता है. कई मामलों में अलग रजिस्ट्रेशन की जरूरत नहीं रहती. एंट्री और इमिग्रेशन प्रक्रिया आम तौर पर आसान लगती है. दस्तावेज स्पष्ट रहते हैं. पढ़ाई और काम से जुड़ी कई सुविधाएं एनआरआई जैसी मिलती हैं। यद्यपि, नियम संबंधित संस्था और कोर्स पर भी निर्भर होते हैं. बैंकिंग, किराया, सिम, केवाईसी जैसे काम कई जगह आसान हो जाते हैं.कौन-सी चीजें नहीं मिलतीं?OCI रखने से भी कई अधिकार नहीं मिलते. वोट देने का अधिकार नहीं होता. सरकारी नौकरी और संवैधानिक पद नहीं मिलते. कुछ संवेदनशील क्षेत्रों में जाने के लिए परमिट लग सकता है. पत्रकारिता, शोध, मिशनरी काम जैसे मामलों में विशेष अनुमति लग सकती है. कृषि भूमि, फार्म हाउस, प्लांटेशन जैसी संपत्ति पर आम तौर पर रोक रहती है.OCI कार्ड किसे मिल सकता है?यह कार्ड आम तौर पर निम्न श्रेणी के लोगों को मिल सकता है. जिनका जन्म भारत में हुआ हो, या जिनके माता-पिता/दादा-दादी का संबंध भारत से रहा हो. जिनके पास भारतीय मूल का वैध प्रमाण हो. विदेशी नागरिक जो भारतीय नागरिक या OCI धारक के पति या पत्नी हों. इसके लिए विवाह और समय संबंधी शर्तें होती हैं. कुछ देशों और मामलों में सुरक्षा कारणों से अलग नियम लागू हो सकते हैं. इसलिए आवेदन से पहले सरकारी निर्देश पढ़ना जरूरी है.कैसे मिलता है OCI कार्ड?इसके लिए ऑनलाइन फॉर्म भरा जाता है. इसमें पासपोर्ट, पता, परिवार, जन्म, और अन्य विवरण आते हैं. फोटो और सिग्नेचर तय नियम के अनुसार अपलोड किए जाते हैं. कुछ जरूरी दस्तावेज लगाए जाते हैं. जैसे, जन्म प्रमाण, पुराने भारतीय पासपोर्ट की प्रति, माता-पिता के कागज, विवाह प्रमाण. फीस भुगतान होता है. देश के अनुसार फीस अलग हो सकती है. वेरिफिकेशन होता है. दूतावास या संबंधित कार्यालय कागज जांचते हैं. जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त कागज मांगते हैं. मंजूरी मिलने पर OCI स्टेटस जारी होता है. फिर कार्ड या ई-डॉक्यूमेंट मिलता है. यात्रा के समय पासपोर्ट और OCI साथ रखना होता है.कार्ड कैसे बनता है?OCI कार्ड बनना सिर्फ प्लास्टिक कार्ड छपना नहीं है. इसके पीछे कई चरण होते हैं. पहले आपकी पहचान तय होती है. फिर आपके दस्तावेजों से भारतीय मूल का संबंध जांचा जाता है. उसके बाद सुरक्षा और रिकॉर्ड मिलान होता है. मंजूरी के बाद आपका यूनिक नंबर बनता है. आपका डेटा सिस्टम में दर्ज होता है. फिर फोटो और विवरण के साथ कार्ड प्रिंट या डिजिटल फॉर्म में जारी होता है. कई जगह कार्ड के साथ स्टिकर या अलग दस्तावेज भी मिलते थे. अब प्रक्रिया अधिकतर डिजिटल ट्रैकिंग के साथ चलती है.आवेदन में देरी क्यों होती है?कई बार आवेदन करने के बावजूद देरी होती है. इसके पीछे कुछ सामान्य कारण हैं. नाम की स्पेलिंग पासपोर्ट से अलग होना, जन्म तिथि में फर्क, फ़ोटो गलत साइज़ का होना, दस्तावेज अधूरे होना, विवाह केस में प्रमाण कमजोर होना आदि. इनसे बचने के लिए सारे कागज साफ स्कैन करें. एक जैसा नाम रखें. और सही फॉर्मेट फॉलो करें. आवेदन में वही नाम लिखें जो पासपोर्ट में है. भारत में पढ़ाई या नौकरी शुरू करने से पहले संस्थान से OCI नियम पूछें. यात्रा के समय OCI के साथ पुराना पासपोर्ट रखें, अगर उसमें OCI विवरण जुड़ा हो. बच्चों के मामले में माता-पिता की सहमति और जन्म प्रमाण अहम होते हैं. किसी एजेंट पर बिना भरोसा न करें.OCI कार्ड भारत आने वाले उन विदेशी नागरिकों के लिए उपयोगी है जिनका भारत से वास्तविक और दस्तावेज-आधारित संबंध है. इससे यात्रा आसान होती है. लंबे समय तक रहना सरल हो जाता है. कई कामों में सुविधा मिलती है, पर यह नागरिकता नहीं है. अधिकार सीमित हैं. आवेदन में सावधानी जरूरी है. हर केस में अंतिम निर्णय सरकारी नियमों पर निर्भर करता है. चूंकि, श्रीलंका में बड़ी संख्या में भारतीय मूल के तमिल समुदाय के लोग रहते हैं, ऐसे में उनके लिए यह सुविधा महत्वपूर्ण हो जाती है.

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