
25 अप्रैल/DPH NEWS
भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने कई राज्यों में हीटवेव का अलर्ट जारी किया है. IMD के मुताबिक, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, मध्य प्रदेश, बिहार और झारखंड में तापमान अधिक बढ़ेगा. देश के कई हिस्सों में तापमान सामान्य से अधिक जा सकता है और टेम्प्रेचर का आंकड़ा 40 डिग्री सेल्सियस तापमान को पार करेगा. तापमान बढ़ने के साथ उमस धीरे-धीरे बढ़ रही है. मौसम की भविष्यवणी में साफ कह गया है कि तापमान बढ़ेगा. तापमान के साथ एक खतरा और बढ़ेगा, वो है उमस भरी गर्मी उमस वाली गर्मी का मतलब है जब तापमान बढ़ने के साथ नमी भी बढ़ती है. ह्यूमिडिटी यानी उमस का मतलब है, हवा में नमी की मात्रा कितनी है. उमस तब बढ़ती है जब जमीन से पानी भाप बनकर उठता है. यह प्रक्रिया तापमान बढ़ने के साथ शुरू हो जाती है. गर्मी में बढ़ती उमस अधिक खतरनाक साबित होती है. जानिए, कब पड़ती है उमस भरी गर्मी, क्यों पड़ती है, यह क्यों अधिक जानलेवा है और कैसे करें बचाव करें सामान्य गर्मी के मुकाबले उमस भरी गर्मी क्यों खतरनाक होती है, अब आसान भाषा में इसका साइंस समझ लेते हैं. जब ज्यादा तापमान बढ़ता है तो पसीना ज्यादा निकलता है. यही पसीना शरीर को ठंडा करने का काम करता है.मौसम विभाग का कहना है, तापमान का आंकड़ा 40 डिग्री सेल्सियस तापमान को पार करेगा.उमस वाली गर्मी इसके उलट होती है क्योंकि इसमें शरीर ठंडा नहीं हो पाता.इसे ऐसे समझ लेते हैं कि जब हवा में नमी की मात्रा ज्यादा होती है तो पसीना नहीं सूख पाता और शरीर की गर्मी बाहर नहीं निकलती.नतीजा, गर्मी में शरीर को ठंडा करने वाला सिस्टम ठीक से काम नहीं करता. शरीर का तापमान बढ़ने लगता है. जिससे हीट स्ट्रेस का खतरा बढ़ता है. उमस में मौसम में हीट स्ट्रोक का खतरा ज्यादा बढ़ता है. चक्कर आना, बेहोशी छाना और तेज बुखार के मामले बढ़ते हैं. इसे नजरअंदाज किया तो स्थिति जानलेवा हो सकती है.उमस वाली गर्मी स्ट्रोक का खतरा बढ़ाती है.ऐसी स्थिति में हवा भारी लगती है. शरीर जल्दी थकता है. कुछ लोगों को सांस लेने में परेशानी होती है. इसलिए सामान्य गर्मी के मुकाबले उमस वाली गर्मी में जानलेवा खतरा बढ़ता है.नमी या उमस वाली गर्मी तब पड़ती है जब तापमान अधिक हो और हवा में नमी ज्यादा हो. यानी जब आसानी से पसीना सूख नहीं पाता और घुटन महसूस होती है. आमतौर पर इसकी शुरुआत मई और जून से होती है. बारिश आने से पहले हवा में नमी की मात्रा बढ़ती है. मानसून के दौरान जुलाई से सितंबर के बीच उमस और ज्यादा रहती है. खासकर उन जगहों पर ज्यादा होती है जो शहर या गांव समुद्री इलाके पास होते हैं और जहां हवा का बहाव कम होता है.अक्सर महसूस किया होगा कि बारिश के बाद उमस बढ़ जाती है. ऐसा इसलिए होता है क्योंकि बारिश होने पर गर्म जमीन से भाप उठती है. नतीजा उमस बढ़ती है. यही वजह है बारिश होने के दौरान गर्मी से राहत महसूस होती है, लेकिन इसके रुकते ही अधिक उमस महसूस होती है.मौसम विभाग ने कहा है, “पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ और दिल्ली के कुछ इलाकों में 24 और 25 अप्रैल को, पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 23 और 25 अप्रैल को, पूर्वी उत्तर प्रदेश में 22 से 26 अप्रैल तक, राजस्थान में 24 से 26 अप्रैल तक, मध्य प्रदेश में 23 से 26 अप्रैल तक, विदर्भ और छत्तीसगढ़ में 24 से 27 अप्रैल तक, और गंगा के मैदानी पश्चिमी बंगाल, बिहार और झारखंड में 23 अप्रैल को लू चलने की सबसे ज्यादा आशंका है.
