
20 july/ DPH News
भारत देश जो बहादुर और जज्बे के लिए बहुत विशाल माना जाता है क्या आप जानते हैं कोई ऐसा भी गांव है जहां हर घर में एक फौजी है और इस गांव से सबसे ज्यादा लोग फौजी भारती होते हैं जानकारी के अनुसार उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले में गंगा नदी के किनारे बसा ‘गहमर’ गांव पूरे देश में अपनी खास पहचान रखता है. इसे भारत का ‘सैनिकों का गांव’ कहा जाता है. इसकी वजह भी बेहद खास है. इस गांव में 5 हजार से ज्यादा लोग ऐसे हैं, जो भारतीय सेना में सेवा दे चुके हैं. इसके अलावा, हजारों लोग अभी भी देश की रक्षा कर रहे हैं. यहां लगभग हर घर से कोई न कोई फौज में जरूर है.देश के ज्यादातर गांवों में सुबह लोग खेतों की तरफ जाते हैं, लेकिन गहमर में सुबह का नजारा थोड़ा अलग होता है. यहां सुबह-सुबह युवा मैदानों में दौड़ लगाते नजर आते हैं. कई लड़के सेना भर्ती की तैयारी करते हैं और रिटायर्ड फौजी उन्हें ट्रेनिंग देते हैं. गांव में सेना की तैयारी सिर्फ एक सपना नहीं, बल्कि पीढ़ियों से चली आ रही परंपरा है. यहां बच्चे बचपन से ही फौजी बनने का सपना देखने लगते हैं.हर घर में दिखती है देशभक्ति की झलकगहमर गांव के घरों में आपको सेना की वर्दी पहने जवानों की तस्वीरें आसानी से मिल जाएंगी. किसी घर में बेटा सेना में है, तो कहीं पिता या दादा फौज में रह चुके हैं. गांव में ऐसा परिवार ढूंढना मुश्किल है, जिसका सेना से कोई रिश्ता न हो. यहां सेना में भर्ती होना सिर्फ नौकरी पाना नहीं माना जाता, बल्कि यह पूरे परिवार और गांव के लिए गर्व की बात होती है.यहां बच्चे बचपन से ही फौजी बनने का सपना देखने लगते हैं.हर घर में दिखती है देशभक्ति की झलकगहमर गांव के घरों में आपको सेना की वर्दी पहने जवानों की तस्वीरें आसानी से मिल जाएंगी. किसी घर में बेटा सेना में है, तो कहीं पिता या दादा फौज में रह चुके हैं. गांव में ऐसा परिवार ढूंढना मुश्किल है, जिसका सेना से कोई रिश्ता न हो. यहां सेना में भर्ती होना सिर्फ नौकरी पाना नहीं माना जाता, बल्कि यह पूरे परिवार और गांव के लिए गर्व की बात होती है.गांव के कई रिटायर्ड सैनिक अब युवाओं को सेना भर्ती की तैयारी करवाते हैं. वे सुबह फिटनेस ट्रेनिंग देते हैं और लिखित परीक्षा की तैयारी में भी मदद करते हैं. यहां कई छोटे-छोटे कोचिंग सेंटर भी चलाए जा रहे हैं, जहां अग्निवीर और अन्य सेना भर्तियों की तैयारी कराई जाती है.बच्चों के खेल में भी दिखता है फौजी रंगगहमर में बच्चों के खेल भी बाकी गांवों से अलग दिखाई देते हैं. यहां कई बच्चे लकड़ी की बंदूक बनाकर खेलते हैं और खुद को सैनिक मानते हैं. धीरे-धीरे यही खेल उनका सपना बन जाता है. स्कूलों में भी बच्चों को छोटी उम्र से शारीरिक गतिविधियों के लिए प्रेरित किया जाता है, ताकि उनमें अनुशासन और फिटनेस की आदत बनेअगर गांव का कोई जवान प्रमोशन पाता है या उसकी पोस्टिंग सियाचिन जैसे कठिन इलाके में होती है, तो पूरा गांव गर्व महसूस करता है. सेना से जुड़ी हर खबर यहां चर्चा का विषय बन जाती है. जब कोई युवा सेना की ट्रेनिंग के लिए गांव छोड़ता है, तब पूरा गांव उसे विदा करने पहुंचता है. यह परंपरा आज भी यहां कायम है
