
06 जुलाई/ DPH NEWS
सार
आज आपको एक ऐसी जानकारी से अवगत करवाएंगे कि आप भी हैरान हो जाओ जानकारी के अनुसार 6 जुलाई को हमारी पृथ्वी सूरज से अपने सबसे सुदूर बिंदु पर होगी, जिसे खगोलीय विज्ञान में अपहेलियन कहा जाता है. इस दौरान धरती और सूरज के बीच की दूरी करीब 15.21 करोड़ किलोमीटर हो जाएगी
विस्तार
आज आपको एक ऐसी जानकारी से अवगत करवाएंगे कि आप भी हैरान हो जाओ जानकारी के अनुसार 6 जुलाई को हमारी पृथ्वी सूरज से अपने सबसे सुदूर बिंदु पर होगी, जिसे खगोलीय विज्ञान में अपहेलियन कहा जाता है.
इस दौरान धरती और सूरज के बीच की दूरी करीब 15.21 करोड़ किलोमीटर हो जाएगी जो जनवरी की शुरुआत के मुकाबले लगभग 50 लाख किलोमीटर ज्यादा है.
सामान्य समझ कहती है कि जब हम किसी अलाव या आग से दूर जाते हैं तो ठंडक महसूस होनी चाहिए लेकिन अंतरिक्ष का विज्ञान इस आम धारणा को पूरी तरह पलट देता है. सूरज से अधिकतम दूरी होने के बावजूद उत्तरी गोलार्ध यानी नॉर्थन हेमिस्फीयरमें भीषण गर्मी का प्रकोप जारी रहेगा और तापमान में कोई गिरावट नहीं आएगी. वैज्ञानिक बताते हैं कि मौसम का बदलना इस बात पर निर्भर नहीं करता कि पृथ्वी सूरज के कितने पास या दूर है बल्कि यह पूरी तरह से धरती के अपने अक्ष पर झुकाव का कमाल हैवैज्ञानिकों के अनुसार, जुलाई के महीने में उत्तरी गोलार्ध सूरज की तरफ 23.5 डिग्री झुका रहता है. इस खास झुकाव की वजह से सूरज की किरणें सीधे जमीन पर पड़ती हैं और दिन की अवधि सर्दियों के मुकाबले काफी लंबी होती है. इसे एक टॉर्च के उदाहरण से समझा जा सकता है. अगर टॉर्च को सीधा दीवार पर चमकाएं तो रोशनी एक छोटे और बेहद चमकदार हिस्से में सिमट जाती है लेकिन टॉर्च को थोड़ा तिरछा करते ही वही रोशनी बड़े इलाके में फैल जाती है. ठीक इसी तरह, जुलाई में सीधे पड़ने वाली सौर ऊर्जा, दूरी बढ़ने से होने वाले मामूली नुकसान को पूरी तरह बेअसर कर देती है. यही वजह है कि भारत समेत पूरे एशिया, यूरोप और उत्तरी अमेरिका में सूरज से सबसे दूर होने के बाद भी तपती गर्मी का अहसास बना रहता है.अपहेलियन के दौरान घट जाती है पृथ्वी की रफ्तारइस अद्भुत खगोलीय घटना का एक और दिलचस्प पहलू यह है कि जब पृथ्वी सूरज से सबसे दूर होती है तो अंतरिक्ष में इसकी रफ्तार भी धीमी हो जाती है. महान खगोलशास्त्री जोहान्स केप्लर के ‘सेकंड लॉ ऑफ प्लेनेटरी मोशन’ के अनुसार, कोई भी ग्रह सूरज के पास होने पर सबसे तेज और दूर होने पर सबसे धीमा चलता है. जनवरी में जहां पृथ्वी की रफ्तार करीब 1,09,000 किलोमीटर प्रति घंटा होती है, वहीं जुलाई में अपहेलियन के वक्त यह घटकर लगभग 1,05,400 किलोमीटर प्रति घंटा रह जाती है. रफ्तार धीमी होने के कारण ही उत्तरी गोलार्ध में गर्मियों का मौसम सर्दियों की तुलना में लगभग पांच दिन लंबा खिंच जाता है. हालांकि, मौजूदा दौर में मानवीय गतिविधियों के कारण बढ़ रहा ग्लोबल वॉर्मिंग का खतरा इस प्राकृतिक संतुलन को बिगाड़ रहा है जिससे गर्मी के दिनों में हीटवेव और चरम मौसम की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैंऔर हीट वेव के कारण बहुत से लोग बीमार हो रहे हैं
