GK:क्या आप जानते हैं तनख़ाह का नाम सैलरी कैसे पड़ा

09जुलाई/ DPH NEWS

सार

क्या आपने कभी सोचा है कि जिस सैलरी शब्द को हम रोज सुनते और बोलते हैं, उसकी शुरुआत आखिर कहां से हुई. दिलचस्प बात यह है कि इस शब्द मतलब सीधे पैसे से नहीं, बल्कि नमक से जुड़ा हुआ है

विस्तार

क्या आपने कभी सोचा है कि जिस सैलरी शब्द को हम रोज सुनते और बोलते हैं, उसकी शुरुआत आखिर कहां से हुई. दिलचस्प बात यह है कि इस शब्द मतलब सीधे पैसे से नहीं, बल्कि नमक से जुड़ा हुआ है. पहले के समय में नमक इतना कीमती माना जाता था कि कई जगह इसे मुद्रा की तरह इस्तेमाल किया जाता था. इसी परंपरा से आगे चलकर सैलरी शब्द की शुरुआत हुई. ऐसे में आइए जानते हैं कि कैसे आपकी तनख्वाह का नाम सैलरी पड़ाआज नमक हर रसोई में आसानी से मिल जाता है, लेकिन पहले के समय में इसकी कीमत बहुत ज्यादा थी. उस दौर में नमक केवल खाने का टेस्ट बढ़ाने के लिए ही नहीं, बल्कि फूड प्रोडक्ट्स को लंबे समय तक सुरक्षित रखने और शरीर के लिए जरूरी पोषक तत्व उपलब्ध कराने के लिए भी बेहद जरूरी माना जाता था. नमक आसानी से उपलब्ध नहीं होता था. इसे दूर-दराज के इलाकों से लाया जाता था, इसलिए इसकी कीमत भी काफी ज्यादा थी. यही वजह थी कि कई जगहों पर नमक का इस्तेमाल मुद्रा यानी भुगतान के रूप में भी किया जाता था.प्राचीन रोमन साम्राज्य में सैनिकों को उनकी सेवाओं के बदले जो भुगतान दिया जाता था, उसे सैलेरियम कहा जाता था. उस समय कई सैनिकों को नकद या सोने-चांदी की जगह नमक के रूप में मेहनताना दिया जाता था. इसी सैलेरियम शब्द से आगे चलकर अंग्रेजी का सैलरी शब्द बना, जिसका इस्तेमाल आज वेतन या तनख्वाह के लिए किया जाता है.रिपोर्ट के अनुसार, रोमन इतिहासकार प्लीनी द एल्डर ने अपनी बुक Natural History में लिखा है कि प्राचीन रोम में सैनिकों को उनके काम के बदले नमक दिया जाता था. इसी परंपरा से सैलरी शब्द की शुरुआत मानी जाती है. कई अध्ययनों में यह भी बताया गया है कि Soldier शब्द लैटिन भाषा के Sal Dare से जुड़ा माना जाता है, जिसका मतलब नमक देना बताया गया है. वहीं रोमन भाषा में नमक के लिए सैलेरियम शब्द का इस्तेमाल होता था, जिससे आगे चलकर सैलरी शब्द बना.कुछ फ्रांसीसी इतिहासकारों का मानना है कि वेतन देने की परंपरा 10,000 ईसा पूर्व से 6,000 ईसा पूर्व के बीच शुरू हुई थी. हालांकि प्राचीन रोम में सैनिकों को लंबे समय तक भुगतान के रूप में नमक दिए जाने का उल्लेख मिलता है. उस दौर में नमक का व्यापार भी होता था और इसकी कीमत काफी ज्यादा थी. इसलिए इसे भुगतान के रूप में इस्तेमाल किया जाता था. बाद में जैसे-जैसे मुद्रा का प्रचलन बढ़ा, नमक की जगह सिक्कों और फिर नकद भुगतान ने ले ली, लेकिन सैलरी शब्द आज भी उसी ऐतिहासिक परंपरा से जुड़ा माना जाता है.

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