GK:क्या आप जानते हैं यूरोप की सड़क 40 डिग्री में ही क्यों पिघलने लगी

3 जुलाई/ DPH NEWS

सार

गर्मी का कर यूरोपीय देशों में भी देखने को मिल रहा है सोशल मीडिया पर वायरल हुई वीडियो जहां सड़के पिघलने लगी है और गाड़ियों को भी पिघलते दिखाया गया है जानकारी के अनुसारयूरोप 40 डिग्री सेल्सियस के आसपास पहुंचते ही सड़के नरम पड़ने लगी हैं. कई जगह पर डामर पिघलने की घटनाएं सामने आई और रेलवे ट्रैक भी भीषण गर्मी से प्रभावित हुए हैं.

विस्तार

गर्मी का कर यूरोपीय देशों में भी देखने को मिल रहा है सोशल मीडिया पर वायरल हुई वीडियो जहां सड़के पिघलने लगी है और गाड़ियों को भी पिघलते दिखाया गया है जानकारी के अनुसार यूरोप 40 डिग्री सेल्सियस के आसपास पहुंचते ही सड़के नरम पड़ने लगी हैं. कई जगह पर डामर पिघलने की घटनाएं सामने आई और रेलवे ट्रैक भी भीषण गर्मी से प्रभावित हुए हैं. यूरोप का यह हाल देखकर लोगों के सवाल उठ रहे हैं कि जब भारत में हर साल कई राज्यों में तापमान 45 से 50 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है, तब यहां की सड़कें क्यों नहीं पिघलती. ऐसे में चलिए आज हम आपको बताते हैं कि फ्रांस की सड़कें और रेलवे ट्रैक 40 डिग्री में ही क्यों पिघलने लगे हैं और भारत कैसे हर साल इतनी गर्मी कैसे झेल लेता है

यूरोप में महज 40 डिग्री तापमान पर सड़कें पिघलने का सबसे बड़ा कारण सड़क निर्माण की गुणवत्ता नहीं बल्कि दोनों क्षेत्रों की जलवायु के हिसाब से अपनाई गई इंजीनियरिंग और निर्माण सामग्री मानी जाती है.

दरअसल, भारत हो या यूरोप दोनों ही क्षेत्र में मौसम को ध्यान में रखकर सड़कें बनाई जाती है और यही सबसे बड़ा अंतर पैदा करता है. यूरोप के अधिकांश देशों में सड़क निर्माण का सबसे बड़ा उद्देश्य और बर्फबारी का सामना करना होता है. वहां तापमान कई बार शून्य से नीचे चला जाता है और लगातार जमने-पिघलने की प्रक्रिया से सड़कें टूट सकती हैं.इस वजह से वहां सड़क निर्माण में ऐसे डामर एस्फाल्ट का इस्तेमाल किया जाता है, जिसमें बिटुमेन की मात्रा अपेक्षाकृत ज्यादा होती है और उसका ग्रेड भी नरम रखा जाता है. इससे सड़क में लचीलापन बना रहता है और ठंड के दौरान उसमें दरारें कम पड़ती है. वहीं यही लचीलापन ज्यादा गर्मी के दौरान कमजोरी बन जाता है. तापमान बढ़ने पर बिटुमेन नरम पड़ने लगता है और भारी वाहनों के दबाव से सड़क पर गड्ढे पड़ने लगते हैं या सड़क पिघलने लगती है. यूरोप में लंबे समय तक 40 डिग्री के आसपास तापमान रहना पहले सामान्य नहीं था, इसलिए वहां की सड़क लगातार पड़ने वाली भीषण गर्मी को ध्यान में रखकर तैयार नहीं की गई. मौजूदा हीट वेव के दौरान कई इलाकों में सड़कों की सतह का तापमान ऊपर पहुंच गया, इसके बाद डामर में मौजूद बिटुमेन में मुलायम होने लगा और कई जगह सड़क की ऊपरी परत प्रभावित हुई. जर्मनी में कुछ स्थानों पर ट्राम सेवाओं को भी रोकना पड़ा, क्योंकि ट्रैक के आसपास इस्तेमाल होने वाली बिटुमिनस सामग्री गर्मी में पिघलकर रेल लाइन तक पहुंच गई थी.

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