
23 मार्च / DPH News
भारत में हर राज्य और केंद्र शासित प्रदेश की अपनी अलग पहचान और इतिहास है। क्या आप जानते हैं कि भारत में एक ऐसा जिला भी है, जो कभी खुद का अलग राज्य हुआ करता था? हालांकि, समय के साथ स्थिति बदल गई और अब एक जिला है, जिसकी सीमा पाकिस्तान से भी लगती है। इस लेख में इसी खास जिले के इतिहास और उसकी यात्रा के बारे में जानेंगे।भारत का इतिहास विविधताओं से भरा हुआ है। देश के राज्य, जिले और शहर अपने अनोखे अतीत के लिए अलग जाने पहचाने जाते हैं। ऐसा ही एक जिला है कच्छ, जिसे पहले एक राज्य जाना जाता था लेकिन अभी इसकी पहचान देश के सबसे बड़े जिलों में से एक है। इसकी सीमा पाकिस्तान से भी लगती है, जिसकी वजह से यह जियोपॉलिटिकल और ऐतिहासिक चर्चाओं में रहता है। UPSC सहित अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं और इंटरव्यू में ऐसे जिलों या शहरों से जीके के प्रश्न पूछे जा सकते हैं, इसलिए यहां इस जिले का इतिहास जानते हैं जो अनोखा अतीत समेटे हुए है।kachchh.nic.in अनुसार, देश के गुजरात राज्य में कच्छ जिला बहुत पुराना और अनोखा अतीत समेटे हुए है। यह जिला पहले पूरा राज्य हुआ करता था। 14वीं सदी में जडेजा वंश के शासकों ने कच्छ पर राज किया था और इसे एक स्वतंत्र राज्य बनाया था। पुराने हिंदू ग्रंथों में कच्छ को समुद्र के किनारे और रेगिस्तान वाला इलाका बताया गया है। 1947 में जब भारत आजाद हुआ था, तब कच्छ ‘भाग C’ राज्य के रूप में था और इसे भारत सरकार चीफ कमिश्नर के जरिए चलाती थी।1956 में राज्यों का पुनर्गठन हुआ था। इस समय कच्छ, सौराष्ट्र और अन्य इलाके मिलकर बंबई राज्य का हिस्सा बन गए। फिर 1 मई 1960 को बंबई राज्य को दो हिस्सों (महाराष्ट्र और गुजरात) में बांटा गया था। तब से कच्छ जिला गुजरात राज्य का हिस्सा बन गया।कच्छ एक प्राचीन भूमि है। 14वीं सदी में जडेजा वंश ने इसे स्वतंत्र राज्य बनाया था। समय-समय पर यह मौर्य, गुप्त, चालुक्य और अन्य राजाओं के अधीन रहा। 1947 के बाद भारत सरकार के मुख्य आयुक्त के तहत चलाया गया। 1956 में इसे बंबई राज्य में शामिल किया गया था। 1960 में बंबई राज्य दो हिस्सों में बंटा और कच्छ गुजरात राज्य का हिस्सा बन गया। आज यह गुजरात का बड़ा और महत्वपूर्ण जिला है।कच्छ जिले की कुछ जमीन पर भारत और पाकिस्तान के बीच सीमा विवाद भी था। यही वजह थी स्वतंत्रता के बाद यह क्षेत्र चर्चा में आया। उस समय दोनों देशों ने तय किया कि विवाद का निपटारा एक निष्पक्ष न्यायाधिकरण (Impartial Tribunal) करेगा। 30 जून 1965 को सहमति हुई कि न्यायाधिकरण का निर्णय दोनों पर मान्य होगा। जिनेवा में न्यायाधिकरण बना और 19 फरवरी 1968 को निर्णय आया। इसके बाद 1968 में सीमा के खंभे लगाए गए और जून 1969 तक काम पूरा हुआ था।