GK: जहाज में यात्री क्यों नहीं ले पाते हवाई तस्वीरें, क्यों मिसअलाइन होती है, प्लेन की खिड़की

04 DPH News

अक्सर ऐसा होता है कि फ्लाइट में बैठते ही यात्री खिड़की की ओर देखने की कोशिश करता है, लेकिन खिड़की या तो आगे होती है या पीछे. जो लोग बादलों का नजारा देखना या हवाई तस्वीरें लेना पसंद करते हैं, उनके लिए यह थोड़ा निराशाजनक होता है. पहली नजर में यह खराब प्लानिंग लग सकती है, लेकिन असल में इसके पीछे ठोस वजहें होती हैं.हवाई जहाज की बॉडी यानी फ्यूजलाज को बहुत मजबूत बनाया जाता है ताकि वह ऊंचाई पर दबाव को सह सके. खिड़कियां समान दूरी पर लगाई जाती हैं ताकि स्ट्रक्चर कमजोर न हो. इन खिड़कियों की पोजिशन यात्रियों की सीट को देखकर तय नहीं की जाती, बल्कि इंजीनियरिंग जरूरतों के हिसाब से होती है. फ्लाइट में सीट्स एक तय दूरी पर लगाई जाती हैं, जिसे सीट पिच कहा जाता है. यह दूरी आराम और सुरक्षा को ध्यान में रखकर तय की जाती है. खिड़कियों की दूरी इस पिच से मेल नहीं खाती, इसलिए दोनों का एक लाइन में आना मुश्किल हो जाता है. एयरलाइंस इसी स्टैंडर्ड को पूरे फ्लीट में फॉलो करती हैं.एयरलाइंस का मकसद होता है ज्यादा से ज्यादा यात्रियों को सुरक्षित तरीके से ले जाना. अगर सीट्स को खिड़कियों के हिसाब से बदला जाए तो यात्रियों की संख्या कम हो सकती है. इससे कमाई पर असर पड़ेगा. यही वजह है कि खूबसूरती से ज्यादा प्राथमिकता क्षमता और मुनाफे को दी जाती है. हवाई जहाज की सीट्स मॉड्यूलर डिजाइन में बनती हैं, जिन्हें अलग-अलग विमानों में आसानी से लगाया जा सके. इससे मेंटेनेंस आसान और सस्ता हो जाता है. अलग-अलग विमान मॉडलों में खिड़कियों की जगह अलग होती है, ऐसे में हर बार सीट को कस्टमाइज करना संभव नहीं होता.हर एयरक्राफ्ट का डिजाइन अलग होता है और खिड़कियों की पोज़िशन भी बदलती रहती है. लेकिन एयरलाइंस ऑपरेशनल आसानी के लिए एक जैसा सीट लेआउट रखना पसंद करती हैं. यही कारण है कि कई बार खिड़की और सीट का तालमेल बिगड़ जाता है.अगर हर खिड़की के हिसाब से सीट्स को एडजस्ट किया जाए तो लागत काफी बढ़ जाएगी. मेंटेनेंस भी जटिल हो जाएगा और फ्लाइट की टर्नअराउंड टाइम बढ़ेगी. स्टैंडर्ड लेआउट एयरलाइंस के लिए समय और पैसे दोनों बचाता है. हवाई जहाज की खिड़कियां गोल इसलिए होती हैं ताकि दबाव समान रूप से बंटे और दरार न पड़े. जहाज आमतौर पर सफेद इसलिए होते हैं क्योंकि सफेद रंग गर्मी को कम सोखता है और खरोंच भी कम दिखती है. आसमान में दिखने वाली सफेद लकीरें असल में कोंट्रेल्स होती हैं, जो इंजन की गर्म गैस और ठंडी हवा से बनती हैं.

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