GK: आपके घर तक कैसे पहुंचती है LPG Gas

21 मार्च /DPH News

LPG गैस का सफर जहाज से शुरू होकर कई प्रोसेस से गुजरते हुए सिलेंडर के रूप में हमारे किचन तक पहुंचता है, जिसमें सुरक्षा और तकनीक का खास ध्यान रखा जाता है. आइए जानते हैं कैसा होता है इसका प्रोसेस भारत से करीब 2800 किलोमीटर दूर ईरान में छिड़ी जंग और इसकी चपेट में आए पूरे मिलिड ईस्ट का दुनिया पर गहराता जा रहा है. कच्चे तेल के दाम तेजी से बढ़ रहे हैं. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद होने से सप्लाई चेन पूरी तरह से टूट गई है, जिसके चलते कई एशियाई देशों में भयानक संकट खड़ा हो गया है. भारत की ही बात करें तो यहां LPG गैस (रसोई गैस) को लेकर मारामारी है. कई जगहों से LPG बुक न होने तो कहीं टाइम पर डिलीवरी न होने की खबरें सामने आ रही हैं ऐसे में राहत की खबर यह है कि LPG से लदे दो जहाज ‘शिवालिक’ और ‘नंदा देवी’ स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पार कर बीते दिनों भारत पहुंच गए चुके हैं. इन दोनों जहाजों पर 92,700 टन गैस लदी थी, जो एक से दो दिन की खपत को पूरा कर सकते हैं. इस बीच लोगों का सवाल यह है कि जो LPG शिवालिक और नंदा देवी जहाज लेकर आए हैं, वो हमारी-आपकी रसोई तक आखिर कैसे पहुंचेगी? चलिए इसकी पूरी प्रक्रिया जान लेते हैं. जहाज से किचन तक LPG गैस का सफर LPG मुख्य रूप से कच्चे तेल (Crude Oil) और प्राकृतिक गैस के Refining के दौरान By-product के रूप में बनता है. यह प्रोपेन और ब्यूटेन गैसों का एक मिश्रण है, जिसे उच्च दबाव पर लिक्विड में बदलकर सिलेंडरों में भरा जाता है. इसके बाद इसकी शिपिंग के दौरान इसे बेहद कम तापमान पर लिक्विड में बदलकर विशेष बड़े जहाजों (Large Gas Carriers) में लोड किया जाता है, फिर ये समुद्री जहाज बंदरगाह से भारत के तटीय टर्मिनल जैसे दाहेज (गुजरात), मंगलुरु (कर्नाटक), या विशाखापत्तनम (आंध्र प्रदेश) तक लाया जाता है.बंदरगाह पर पहुंचने के बाद -42 डिग्री सेल्सियस तापमान पर तरल अवस्था में मौजूद एलपीजी को जहाज से निकालकर विशाल कोल्ड स्टोरेज टैंकों में सुरक्षित किया जाता है. फिर इन बड़े स्टोरेज टैंकों से गैस को पाइपलाइन के माध्यम से देशभर में स्थित बॉटलिंग प्लांट्स तक भेजा जाता है. इसके बाद इसे खाली सिलेंडरों की अच्छी तरह जांच करने के बाद, प्रत्येक सिलेंडर में सही मात्रा में जैसे 14.2 किलोग्राम में एलपीजी गैस भरी जाती है. क्योंकि LPG गंधहीन होती है, इसलिए इसमें Mercaptan नामक पदार्थ मिलाया जाता है, ताकि लीकेज होने पर तुरंत पता चल सके. इसके बाद भरे हुए सिलेंडरों को ट्रकों में लादकर स्थानीय गोदामों तक पहुंचाया जाता है. इस पूरी प्रक्रिया के बाद जब आप गैस सिलेंडर की बुकिंग करते हैं, तब गैस एजेंसी के डिलीवरी मैन आपके घर तक सिलेंडर पहुंचाते हैं.

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