
15 मार्च/DPH NEWS
यह रमजान का पाक महीना चल रहा है. रोजेदार इस पूरे महीने रोजे रखते हैं. पूरी दुनिया में जितने भी धर्म हैं सब में उपवास एक काफी खास आध्यात्मिक अभ्यास है. अलग-अलग धर्मों में उपवास को लेकर अपने-अपने रीति रिवाज और नियम होते हैं. आइए जानते हैं कि किस धर्म में सबसे कठोर व्रत होता है.जैन धर्म में उपवास का एक काफी बड़ा स्थान है. यहां व्रत आत्म अनुशासन और आत्मा की शुद्धि से गहराई से जुड़ा हुआ है. जैन धर्म के कई उपवास काफी ज्यादा मुश्किल होते हैं. इनका मुख्य उद्देश्य शारीरिक जरूरतों से लगाव छोड़ना होता है. सबसे मशहूर प्रथा में से एक संथारा है. इस प्रथा में जीवन के अंतिम पड़ाव पर पहुंचा व्यक्ति मृत्यु को स्वीकार करने के एक काम के रूप में अपनी मर्जी से भोजन और जल का त्याग कर देता है. एक और काफी मुश्किल प्रथा चौविहार है. इसमें सूर्यास्त के बाद भोजन और जल ग्रहण करना बंद कर दिया जाता है और अगले दिन सूर्योदय के बाद ही इसे फिर से शुरू करते हैं. इसी के साथ पर्युषण व्रत के दौरान 8 से 10 दिनों तक कठोर उपवास रखा जाता है. देवी देवता और व्यक्तिगत भक्ति के आधार पर काफी अलग-अलग होती है. कुछ उपवास काफी प्रतीकात्मक होते हैं जबकि कुछ कठोर होते हैं. सबसे मुश्किल उपवास में से एक है निर्जला एकादशी का व्रत. इसमें श्रद्धालु पूरे एक दिन और रात तक भोजन और जल दोनों का त्याग करते हैं. करवा चौथ और छठ जैसे उपवास भी अपने कठोर नियमों के लिए जाने जाते हैं. इनमें श्रद्धालु अक्सर लंबे समय तक पानी पीने से भी परहेज करते हैं. नवरात्रि के दौरान कई श्रद्धालु लगातार 9 दिनों तक उपवास रखते हैं. इस दौरान वे आमतौर पर सिर्फ फल या फिर सीमित शाकाहारी भोजन ही लेते हैं.इस्लाम में रोजाइस्लाम में रोजा धार्मिक कर्तव्यों में से एक मुख्य कर्तव्य है. पवित्र महीने रमजान के दौरान मुसलमान एक उपवास रखते हैं जिसे रोजा के नाम से जाना जाता है. भोर से लेकर सूर्यास्त तक रोजेदार भोजन और जल को पूरी तरह से छोड़ देते हैं. यह उपवास चंद्र कैलेंडर के आधार पर 29 या 30 दिनों तक रोज रखा जाता है. ईसाई धर्म में व्रत ईसाई धर्म में व्रत अक्सर प्रायश्चित, विनम्रता और जरूरी धार्मिक आयोजनों की तैयारी के रूप में किया जाता है. व्रत की सबसे जरूरी अवधियों में से एक है लेंट. यह ईस्टर से 40 दिन पहले तक चलती है. इस दौरान कई ईसाई आध्यात्मिक अनुशासन के तौर पर कुछ खास तरह के भोजन या फिर निजी सुख सुविधाओं को त्याग देते हैं. ऐतिहासिक रूप से ब्लैक फास्ट नाम की एक और कठोर प्रथा थी. इसमें श्रद्धालु शाम को सिर्फ एक बार भोजन करते थे और मांस, दूध और अंडे जैसे खाद्य पदार्थों से परहेज करते थे.सिख धर्म में व्रत बाकी धर्मों के उलट सिख धर्म में व्रत की कोई केंद्रीय भूमिका नहीं है. सिख शिक्षाएं इस बात पर जोर देती हैं कि आध्यात्मिक विकास शरीर को भूखा रखने से नहीं होता. इसके बजाय सिख दर्शन सेवा और सिमरन पर केंद्रित है. यह धर्म अपने अनुयायियों को संतुलित जीवन जीने, लंगर रसोई के जरिए दूसरों के साथ भोजन साझा करने और करुणा और विनम्रता का अभ्यास करने के लिए प्रेरित करता है.