Gk,जानिए क्यों लगता है चंद्र ग्रहण और सूर्य ग्हण

मार्च 11/DPH News

मार्च 2026 की शुरुआत एक खास खगोलीय घटना से हो रही है.आज यानी 3 मार्च को साल का पहला पूर्ण चंद्र ग्रहण लगने वाला है. भारत में ये शाम के समय दिखाई देगा, लेकिन सिर्फ आखिरी चरण में. पूरा चंद्रमा लाल रंग का (ब्लड मून) नजर आएगा.आइए ऐसे में ये समझते हैं कि चंद्र ग्रहण असल में होता क्या है? क्यों लगता है? और इसके कितने प्रकार होते हैं? इस बारे में विज्ञान क्‍या कहता है।चांद कोई खुद की रोशनी वाला तारा नहीं है. ये एक ठंडा, चट्टानी पिंड है जिसका डायमीटर लगभग 3,476 किलोमीटर है. चांद चमकता इसलिए है क्योंकि सूरज की रोशनी उसकी सतह से टकराकर वापस हमारी आंखों तक आती है. चांद हर 29.5 दिन में पृथ्वी का एक चक्कर लगाता है.जब सूरज, पृथ्वी और चांद एक सीधी लाइन में आ जाते हैं और पृथ्वी बीच में आ जाती है तो पृथ्वी की छाया चांद पर पड़ती है. यही छाया चंद्र ग्रहण कहलाती है. ये घटना सिर्फ पूर्णिमा के दिन ही हो सकती हैक्योंकि पूर्णिमा पर चांद पृथ्वी के ठीक सामने होता है.इसी तरह की घटना जब सूर्य के साथ होती है तो वह सूर्य ग्रहण कहा जाता है.हर पूर्णिमा पर क्यों नहीं लगता चंद्र ग्रहण ?पृथ्वी सूरज के चारों ओर जिस सपाट घेरे (ऑर्बिट) में घूमती है उसका सतह चांद के ऑर्बिट से लगभग 5 डिग्री झुका हुआ है इसलिए ज्यादातर पूर्णिमा पर चांद पृथ्वी की छाया के ऊपर या नीचे से गुजर जाता है और ग्रहण नहीं लगता, लेकिन साल में 2 से 4 बार चांद पृथ्वी की छाया (पेनुम्ब्रा या अम्ब्रा) से गुजरता है और ग्रहण लग जाता है.।

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