16 मार्च/ DPH News

विदेश मंत्रालय ने बताया कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में वॉरशिप भेजने को लेकर अमेरिका के साथ कोई बातचीत नहीं हुई है. ट्रंप ने चीन, फ्रांस समेत कई देशों से वॉरशिप भेजने की अपील की थी.अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खुला रखने के लिए कई देशों से अपने वॉरशिप भेजने का आह्वान किया था. इसे लेकर विदेश मंत्रालय ने सोमवार (16 मार्च 2026) को कहा कि भारत ने होर्मुज मार्ग से शिप के सुरक्षित आवागमन को सुनिश्चित करने के लिए नौ सैनिक जहाजों की तैनाती के संबंध में अमेरिका के साथ द्विपक्षीय चर्चा नहीं की है.ईरान की ओर से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर सख्त रवैये के बाद ट्रंप ने सहयोगी देशों से इस रास्ते की सुरक्षा के लिए वॉरशिप भेजने की अपील की थी. उन्होंने चीन, फ्रांस, जापान, दक्षिण कोरिया और ब्रिटेन का नाम लेते हुए उम्मीद जताई थी कि ये देश मदद के लिए आगे आएंगे. हालांकि किसी भी देश ने अभी तक ट्रंप की इस अपील पर आगे आकर अपनी प्रतिक्रिया नहीं दी है और न ही वॉरशिप भेजे.विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल से पूछा गया कि क्या अमेरिका ने भारत से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में वॉरशिप भेजने के लिए संपर्क किया है और इसे लेकर सरकार का क्या रुख है? इसके जवाब में उन्होंने कहा, ‘हम इस मामले में कई देशों की ओर से की जा रही चर्चा से अवगत हैं. अभी तक हमने इस मुद्दे को लेकर द्विपक्षीय स्तर पर चर्चा नहीं की है.’ MEA प्रवक्ता ने कहा कि भारत इस मामले में कई हितधारकों के साथ बातचीत जारी रखेगा.फाइनेंशियल टाइम्स को दिए इंटरव्यू में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि भारत का ईरान के साथ स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से भारतीय ध्वज वाले शिप के गुजरने के लिए कोई समझौता नहीं किया है. उन्होंने कहा कि जहाजों के वहां गुजरने के लेकर ईरान के साथ बातचीत जारी है और उसके अच्छे परिणाम मिल रहे हैं. विदेश मंत्रालय ने प्रवक्ता ने कहा कि होर्मुज के रास्ते भारतीय जहाजों के सुरक्षित गुजरने के बदले में नई दिल्ली ने कुछ भी नहीं किया है, बल्कि यह हमारे संबंधों के कारण हुआ है.पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष को देखते हुए, नई दिल्ली ईरान में फंसे भारतीय नागरिकों से आग्रह कर रही है कि वे सीमा पार कर आर्मेनिया की ओर आ जाएं, ताकि वहां से स्वदेश वापसी की सुविधा प्रदान की जा सके. विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा, ‘ईरान से अब तक 550 से अधिक भारतीय नागरिकों की सुरक्षित निकासी में सुविधा प्रदान करने के लिए आर्मेनिया सरकार और वहां के लोगों को धन्यवाद