
वॉशिंगटन/तेहरान/DPH NEWS
मिडिल ईस्ट के रेगिस्तान से उठ रही बारूद की गंध ने अब पूरी दुनिया की नींद उड़ा दी है। अमेरिका और ईरान के बीच छिड़े इस भीषण महायुद्ध को आज पूरे 32 दिन हो चुके हैं, लेकिन शांति की उम्मीद दूर-दराज तक नजर नहीं आ रही है। बुधवार की रात जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने व्हाइट हाउस से राष्ट्र को संबोधित किया, तो उनके 18 मिनट के भाषण ने दुनिया भर के शेयर बाजारों और तेल अर्थव्यवस्थाओं में हड़कंप मचा दिया।ट्रंप का यह संबोधन सिर्फ एक भाषण नहीं था, बल्कि ईरान के लिए आखिरी अल्टीमेटम और दुनिया के लिए एक बड़ी चेतावनी थी। इस युद्ध की तपिश अब सीधे भारतीय रसोई और आपकी जेब तक पहुँचने वाली है। आखिर ट्रंप ने ईरान के परमाणु ठिकानों को लेकर क्या दावा किया और क्यों ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ में छिड़ी यह जंग भारत के लिए किसी बुरे सपने से कम नहीं है? आइए जानते हैं इस विनाशकारी युद्ध की इनसाइड स्टोरी।राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने संबोधन में एक ऐसा दावा किया जिसने अंतरराष्ट्रीय खुफिया एजेंसियों को भी हैरान कर दिया है। ट्रंप ने दहाड़ते हुए कहा कि अमेरिका और इजरायल की जोड़ी ने ईरान के सबसे सुरक्षित माने जाने वाले परमाणु ठिकानों— फोर्डो, नतांज और इस्फहान को पूरी तरह तहस-नहस कर दिया है। उन्होंने यहाँ तक कह दिया कि ये ठिकाने अब सिर्फ ‘न्यूक्लियर डस्ट’ यानी परमाणु कचरे के ढेर में बदल चुके हैं और अमेरिकी सैटेलाइट चौबीसों घंटे इनकी निगरानी कर रहे हैं।हालांकि कई स्वतंत्र रिपोर्ट्स इन दावों पर सवाल उठा रही हैं, लेकिन ट्रंप के तेवर साफ हैं। उन्होंने संकेत दिया कि यह खूनी खेल अभी खत्म नहीं होने वाला है। अगले 2 से 3 हफ्तों तक भीषण हमले जारी रहेंगे, जिसका सीधा मतलब है कि यह महायुद्ध कम से कम 8 हफ्तों तक खिंच सकता है। ट्रंप ने अब ‘रेजीम चेंज’ यानी सत्ता परिवर्तन की बात से पल्ला झाड़ते हुए कहा कि उनका मकसद सिर्फ ईरान की सैन्य ताकत को कुचलना हैइस युद्ध का सबसे खतरनाक पहलू ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ है, जिसे दुनिया की ‘तेल की नस’ कहा जाता है। ट्रंप ने साफ शब्दों में कह दिया कि जो देश इस रास्ते से तेल लेते हैं, उन्हें अपनी सुरक्षा की जिम्मेदारी खुद उठानी चाहिए। उन्होंने यूरोपीय देशों और अन्य सहयोगियों पर निशाना साधते हुए कहा कि अब उन्हें हिम्मत दिखानी होगी और आगे आना होगा।ट्रंप का यह रुख भारत जैसे देशों के लिए बेहद चिंताजनक है क्योंकि हमारी तेल आपूर्ति का एक बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है। अगर यह रास्ता पूरी तरह बाधित होता है, तो भारत में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी सिलेंडर की किल्लत होना तय है। ट्रंप ने यह भी धमकी दी कि अगर ईरान समझौते की मेज पर नहीं आया, तो अमेरिका उसके पावर ग्रिड और बिजली संयंत्रों को निशाना बनाएगा, जिससे पूरा ईरान अंधेरे में डूब जाएगा।भारत के नजरिए से देखें तो ट्रंप के इस भाषण ने खतरे के सायरन बजा दिए हैं। 32 दिनों से जारी इस युद्ध ने पहले ही ग्लोबल सप्लाई चेन को तोड़ दिया है। अगर युद्ध 8 हफ्तों तक चलता है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच सकती हैं। इसका सीधा असर भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर पड़ेगा, जिससे माल ढुलाई महंगी होगी और आम आदमी के लिए सब्जी से लेकर हर जरूरी सामान के दाम आसमान छूने लगेंगे।उधर, ईरान के राष्ट्रपति ने भी साफ कर दिया है कि वे पीछे हटने के मूड में नहीं हैं। ईरान की ओर से पलटवार की तैयारी और ट्रंप की जिद के बीच भारत की ऊर्जा सुरक्षा दांव पर लगी है। कुल मिलाकर, आने वाले 15 दिन यह तय करेंगे कि दुनिया एक बड़े आर्थिक संकट की ओर बढ़ेगी या कूटनीति इस विनाश को रोक पाएगी।
