
23 मार्च / DPH News
चैत्र नवरात्रि की शुरुआत 19 मार्च को हो गई है। वहीं चैत्र नवरात्रि के पांचवें दिन मां दुर्गा के पंचम स्वरूप मां स्कंदमाता की पूजा की जाती है, जो कि आज है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से पूजा करने पर संतान प्राप्ति के योग बनते हैं और संतान से जुड़े कष्ट दूर होते हैं। मां स्कंदमाता, भगवान कार्तिकेय (स्कंद) की माता हैं, इसलिए इन्हें मातृत्व, करुणा और पालन-पोषण का प्रतीक माना जाता है।मां स्कंदमाता चार भुजाओं वाली देवी हैं। दो हाथों में कमल पुष्प धारण करती हैं, एक हाथ में बाल स्वरूप भगवान कार्तिकेय को गोद में लिए रहती हैं और चौथा हाथ भक्तों को आशीर्वाद देने की मुद्रा में होता है। मां का वाहन सिंह है, लेकिन वे कमल के आसन पर विराजमान रहती हैं, इसलिए इन्हें पद्मासना देवी भी कहा जाता है। इनका स्वरूप अत्यंत शांत, सौम्य और दिव्य आभा से युक्त होता है।सुबह स्नान करके साफ वस्त्र धारण करें और मां स्कंदमाता की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। उन्हें फूल, अक्षत, रोली और पंचामृत अर्पित करें। केले का भोग लगाकर मंत्रों का जप करें और अंत में आरती करें। श्रद्धा और सच्चे मन से की गई पूजा से मां शीघ्र प्रसन्न होती हैं।