चौथा नवरात्रा :चौथे स्वरूप माता कूष्मांडा की पूजा की जाती है

22 मार्च/DPH News

नवरात्र के चौथे दिन मां कूष्मांडा की पूजा का विधान बताया गया है. कहते हैं कि देवी कूष्मांडा के मुस्कान से ही ब्रह्मांड का अंधकार दूर हुआ था. अष्टभुजाओं वाली मां कूष्मांडा की पूजा से जीवन में चल रही बड़ी से बड़ी समस्या भी दूर हो जाती है। मां कूष्मांडा की आठ भुजाएं हैं, इसलिए इन्हें अष्टभुजा देवी भी कहा जाता है. देवी अपने आठ हाथों में कमंडल, धनुष, बाण, चक्र, गदा, कमल-पुष्प, अमृत कलश, और जप माला धारण करती हैं. कहते हैं कि मां कूष्मांडा ने अपनी मुस्कान से सृष्टि की रचना की थी. पहले सृष्टि में सिर्फ घना अंधेरा था. देवी की मुस्कान ने ही अपनी मुस्कान से इसे रोशन किया था. देवी कूष्मांडा में सूर्य जैसा तेज है और उनकी विधिवत उपासना से शक्ति और ऊर्जा प्राप्त की जा सकती है. आइए जानते हैं कि मां कूष्मांडा की पूजन विधि क्या है.

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