
12 मार्च 2026/DPH NEWS
विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को कहा कि उन रिपोर्ट्स पर अभी कुछ भी कहना जल्दबाज़ी होगी, जिनमें दावा किया गया है कि ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ से भारतीय जहाजों को गुजरने की अनुमति देने पर राज़ी हो गया है.हालांकि पत्रकारों के सवालों के जवाब में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारतीय विदेश मंत्री ने ईरान के विदेश मंत्री से इस बारे में बातचीत की है.जायसवाल ने कहा, “विदेश मंत्री एस जयशंकर और उनके ईरानी समकक्ष के बीच हाल के दिनों में तीन बार बातचीत हुई है. आखिरी बातचीत में शिपिंग की सुरक्षा और भारत की ऊर्जा सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई. इसके अलावा अभी कुछ भी कहना जल्दबाज़ी होगी.”इससे पहले भारतीय मीडिया में ख़बरें छपी थीं कि ईरान ने दो भारतीय टैंकरों को स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ से निकलने की इजाज़त दे दी थी. पीआईबी के अनुसार, पहले भारत के तेल आयात का आधा हिस्सा स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ से होकर गुजरता था, जबकि आज 70 प्रतिशत दूसरे वैकल्पिक चैनलों से आयात होता है, जिससे आपूर्ति जोखिम में काफ़ी कमी आई है. शिपिंग मंत्रालय के अधिकारी राजेश कुमार सिन्हा गुरुवार को कहा कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ के पश्चिम और पूर्व में भारत के झंडे वाले 28 जहाज मौजूद हैं. इन जहाजों पर कम से कम 667 भारतीय नाविक सवार हैं.यह घटनाक्रम उस समय सामने आया है जब बुधवार को गुजरात के कांडला बंदरगाह जा रहे एक थाईलैंड के जहाज पर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ में हमला हुआ था.इस हमले पर प्रतिक्रिया देते हुए विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को कहा, “भारत इस बात की निंदा करता है कि जारी संघर्ष में व्यावसायिक जहाजों को सैन्य हमलों का निशाना बनाया जा रहा है.”इसी बीच बीबीसी पर्शियन के मुताबिक़, ईरान के नए सुप्रीम लीडर मोजतबा ख़ामेनेई ने ईरान के सरकारी टीवी पर कहा कि ‘ईरान को स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ पर लगातार निशाना साधते रहना चाहिए.’उनके इस ताज़ा बयान ये आशंका बढ़ गई है कि आने वाले दिनों में इस रास्ते तेल और गैस के आवागमन में मुश्किलें बनी रहेंगी.
