
10 मार्च/DPH News
भारत में जब भी पुरानी मस्जिदों का जिक्र आता है, तो अक्सर लोगों के दिमाग में मुगल काल या विदेशी आक्रमणकारियों की तस्वीर उभरती है. कई लोगों के मन में सवाल उठता है कि आखिर कैसे भारत में मुस्लिम धर्म का प्रभाव बढ़ा, कहां पर भारत की पहली मस्जिद बनी, किसने इसका निर्माण करवाया होगा? ऐसे में आपको जानकर हैरानी होगी कि भारत की पहली मस्जिद किसी युद्ध या आक्रमण का नतीजा नहीं, बल्कि एक हिंदू राजा की उदारता और उनके बदले हुए विश्वास की कहानी है. भारत के धार्मिक और सांस्कृतिक इतिहास में केरल का एक विशेष स्थान है, जहां सदियों से विभिन्न धर्मों का संगम होता रहा है. इन्ही कहानियों में सबसे प्रमुख है केरल के राजा चेरामन पेरुमल की दास्तां. चेरामन पेरुमल उस समय केरल के शासक थे और उनकी राजधानी कोडुंगल्लूर हुआ करती थी. इतिहास के अनुसार, राजा चेरामन ने इस्लाम धर्म को अपनाया और मक्का जाने का निर्णय लिया. लेकिन जाने से पहले उन्होंने भारत में इस्लाम की पहली नींव रखने का आदेश दिया. इसी आदेश का परिणाम थी ‘चेरामन जुमा मस्जिद’, जिसे भारत की पहली मस्जिद माना जाता है और इसका निर्माण 629 ईस्वी (AD) में हुआ था
