अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का सामने आया सख्त और चौंकाने वाला बयान

31 मार्च/ DPH News

ईरान के साथ जारी युद्ध के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का एक बेहद सख्त और चौंकाने वाला बयान सामने आया है। ईरान के बैकफुट पर जाने के बाद अब ट्रंप अपने ही सहयोगी देशों पर बरस पड़े हैं। उन्होंने साफ लहजे में कह दिया है कि अब दुनिया के देशों को अपनी सुरक्षा और जरूरतों के लिए खुद जिम्मेदारी लेनी होगी, अमेरिका हमेशा उनके पीछे खड़ा नहीं रहेगा।ट्रंप की दो टूक: तेल हमसे लो या खुद लड़ोट्रंप ने अपने सहयोगी देशों को दो टूक सलाह दी है। पहली सलाह उन देशों के लिए है जो स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) में तनाव की वजह से जेट फ्यूल की किल्लत से जूझ रहे हैं। ट्रंप ने कहा कि अगर उन्हें तेल चाहिए तो वे अमेरिका से खरीद सकते हैं, क्योंकि अमेरिका के पास तेल का पर्याप्त भंडार हैउन्होंने विशेष रूप से ब्रिटेन का नाम लेते हुए तंज कसा कि ब्रिटेन ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई में साथ नहीं दिया, लेकिन आज वही जेट फ्यूल की कमी का रोना रो रहा है। दूसरी सलाह देते हुए ट्रंप ने कहा कि ये देश हिम्मत दिखाएं और अगर जरूरत पड़े तो स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर जाकर खुद नियंत्रण हासिल करें। ट्रंप के शब्दों में, “आपको खुद लड़ना सीखना होगा, अमेरिका हमेशा आपके साथ नहीं रहेगा, ट्रंप के इस बयान के गहरे कूटनीतिक मायने निकाले जा रहे हैं। इसका सीधा मतलब यह है कि चाहे सुरक्षा की बात हो या तेल की सप्लाई, अब सहयोगी देशों को आत्मनिर्भर बनना होगा। ट्रंप ने संकेत दिया कि जो देश मुश्किल समय में अमेरिका के साथ खड़े नहीं हुए, अमेरिका भी अब उनसे दूरी बना सकता है। उन्होंने यह भी दावा किया कि ईरान को काफी हद तक कमजोर किया जा चुका है और युद्ध का सबसे कठिन दौर बीत चुका है। अब आगे का मोर्चा दूसरे देशों को संभालना चाहिए।ट्रंप की नाराजगी सिर्फ ब्रिटेन तक सीमित नहीं रही, उन्होंने फ्रांस को भी आड़े हाथों लिया। ट्रंप ने आरोप लगाया कि फ्रांस ने इजराइल जा रहे अमेरिकी सैन्य विमानों को अपने हवाई क्षेत्र (Airspace) के इस्तेमाल की इजाजत नहीं दी। ट्रंप ने इसे ‘बुरा रवैया’ करार देते हुए चेतावनी दी कि अमेरिका इस बात को हमेशा याद रखेगा। मिडल ईस्ट में जारी इस जंग ने अब तक भारी तबाही मचाई है। आंकड़ों के मुताबिक, इस युद्ध में 3,000 से अधिक लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। ईरान के डिप्टी हेल्थ मिनिस्टर के अनुसार, इजराइली और अमेरिकी हमलों में अब तक 1,900 से अधिक ईरानी नागरिक मारे गए हैं। वहीं लेबनान में यह आंकड़ा 1,200 के पार है। इजराइल में 19 लोगों की मौत हुई है, जबकि युद्ध के दौरान अब तक 13 अमेरिकी सैनिक भी मारे जा चुके हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *